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यूपी: अचानक पत्थर टूटा और कुएं में गिरे 24 लोग

Wed, 11 Mar 2015 08:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इगलास, सासनी, अलीगढ़
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अलीगढ़ जिले की सीमा पर बसे इगलास क्षेत्र के गांव पढ़ील में कुआं पूजन के दौरान हुई दुर्घटना में कुएं में गिरने से तीन मासूमों की जान चली गई, जबकि बच्चों समेत दो दर्जन लोग जख्मी हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। आधा दर्जन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। खबर पर जिला एवं पुलिस प्रशासन राहत-बचाव कार्य में जुट गया। डीएम-एसएसपी ने अस्पतालों में पहुंच घायलों का हाल जाना।
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गांव पढ़ील निवासी हीरो उर्फ प्रेम सिंह प्रजापति के दो बेटों सोनू व केशव की मंगलवार को बारात हाथरस के सहपऊ क्षेत्र के गांव उधैना जा रही थी।

शाम करीब पांच बजे गांव के पुराने चौपेरा कुएं (चारों तरफ से खुला हुआ) पर दोनों भाइयों का कुआं पूजन चल रहा था। इस कुएं को पत्थरों से पाट रखा गया है, जहां तमाम बच्चे व बड़े खड़े थे। भीड़ का बोझ बढ़ने पर अचानक पत्थर टूट गया और दो दर्जन से अधिक लोग इस कुएं में समा गए। इससे वहां कोहराम मच गया।

रस्सी के सहारे लोगों को बाहर निकाला

आनन-फानन गांव के साहसी लोगों ने रस्सी आदि की मदद से अंदर गिरे लोगों को बाहर निकाला और  विभिन्न अस्पतालों में भिजवाया, जहां श्याम कौशिक (5) पुत्र ब्रज किशोर, हरवीरी (11) पुत्री भानू प्रकाश, रेखा(10) पुत्री जयप्रकाश को मृत घोषित कर दिया गया।

इधर, गांव में एसपीआरए संसार सिंह, एसडीएम इगलास, सीओ इगलास, एसओ इगलास भी पहुंच गए। जिला मुख्यालय पर डीएम डॉ. बलकार सिंह, एसएसपी जे. रविंदर गौड़, एडीएम ई संजय चौहान घायलों का इलाज कराने में जुट गए। देर रात तक आधा दर्जन घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। इस दुर्घटना के बाद दो सगे भाइयों की शादी औपचारिकताओं तक सिमट गई। देर रात तक गांव में बच्चों की गिनती का काम चल रहा था।

जिलाधिकारी डॉक्टर बलकार सिंह ने बताया कि इस पूरे मामले में एसडीएम को जांच सौंपी गई है। साथ ही पहली प्राथमिकता घायलों का इलाज कराना है। विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है। किसी भी स्तर पर इलाज में कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके बाद मुआवजे आदि व्यवस्थाओं का इंतजाम किया जाएगा।

सिक्के लूटने की परंपरा ने बढ़ाया कुएं पर बोझ

निकरौसी और कुआं पूजन के समय आज भी सिक्के लुटाने की परंपरा गांव क्षेत्र में कायम है। बस इन्हीं सिक्कों को लूटने के लिए बच्चों की भीड़ जुट जाती है। जब तक सिक्के लुटाए जाते हैं, तब तक बच्चे इसी तरह जमा रहते हैं। मंगलवार को पढ़ील में भी कुछ ऐसा ही हुआ। निकरौसी के बाद कुआं पूजन चल रहा था। दूल्हों की मां कुएं पर बैठी थी और बच्चों के साथ कुछ बड़ों की भीड़ कुएं के पत्थर पर जमा थी। तभी यह दुर्घटना हुई। हालांकि इन्हें समझाया और टोका भी गया। मगर कोई मानता कहां है।

नीचे दबने वाले हुए ज्यादा गंभीर
एक साथ 20 से 25 लोग जब गिरे तो उनमें नीचे दबने वालों की हालत ज्यादा नाजुक रही। हालांकि एक-एक कर उन्हें निकाला गया और श्याम कौशिक को तो गांव में ही मृत घोषित कर दिया गया। बाकी दो बच्चियों को जिला अस्पताल आते-आते मृत घोषित किया गया। इनमें से श्याम कौशिक कस्बा सासनी के प्रकाश एकेडमी स्कूल का एलकेजी का छात्र था, जिसकी बुधवार को परीक्षा थी, जबकि रेखा मूल रूप से चंडौस के गांव जहराना की रहने वाली थी। वह रिश्तेदारी में शादी में शामिल होने गई थी।

यह लोग हुए घायल
इस दुर्घटना में पायल (9) पुत्री नीटू निवासी खुर्जा, रीना (10) पुत्री सुरेश, तेज सिंह (11) पुत्र हरी सिंह, गवेंद्र (15) पुत्र कुंवरपाल निवासी खुर्जा, आकाश (13) पुत्र बनवारी, रेशमा (35) पत्नी कुंवरपाल, विवेक (डेढ़) पुत्र कुंवरपाल, फतेह सिंह (6) पुत्र जुल्फी, इशाक (8) पुत्र छोटे, आरिफ (12) पुत्र इशहाक, बनी सिंह (14) पुत्र कन्हैया, शबाना (12) पुत्र छोटे, मोनू (12) पुत्र प्रेम सिंह, नीरज, प्रवीन (11) प्रकाश, अमरपाल, जावेद पुत्र शरीफ, अमन पुत्र सोनू, रामबाबू, कुंवरपाल, बनी सिंह पुत्र कन्हैयालाल, लालो पुत्र लालाराम, अशरफ अली पुत्र मिर्जा अली, शहनाज पुत्र अशरफ, भोला, दिव्यकांत, सुभाना, विवेक, लालो घायल हुए हैं। इनमें से एक दर्जन मेडिकल कॉलेज में हैं। आधा दर्जन जिला अस्पताल में और कुछ अलीगढ़-हाथरस के निजी अस्पतालों में भरती हैं। घायलों में बनी सिंह, जावेद व शहनाज की हालत नाजुक बताई गई है।

कुएं से अवैध कब्जा हटता तो न जाती जानें

हर बार की तरह एक बार फिर सिस्टम निशाने पर आ गया। इस बार तहसील दिवसों में आने वाली शिकायतों के निस्तारण की पोल पढ़ील के हृदय विदारक हादसे ने खोली है। दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ग्रामीण चीख-चीखकर कह रहे थे कि शिकायतें दीं, तब किसी ने नहीं सुना। कुएं पर अवैध कब्जा कर रखा है। अगर कब्जा हट जाता तो शायद कुएं की मरम्मत हो जाती और आज यह हादसा न होता। मगर इस सवाल का किसी अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं था। इस मसले पर चुप्पी साधने और मुद्दे को टालने का काम वहां मौजूद अधिकारी कर रहे थे।

ग्रामीणों ने बताया कि भूरा नाम के ग्रामीण के दरवाजे पर यह अर्से पुराना कुआं है। सार्वजनिक कुआं भूरा ने अपने बरामदे में शामिल कर लिया। मगर कभी कुएं की मरम्मत नहीं कराई। पुराने पत्थर से जैसे कुआं पटा हुआ था, वह ज्यों का त्यों था। कुएं पर कब्जे को लेकर विवाद हुए। मरम्मत के लिए पहले शर्त आई कि अवैध कब्जा हटेगा, तभी मरम्मत होगी। तहसील दिवसों में शिकायतें हुईं।

एसडीएम-तहसीलदार गांव में आए और मौका देख बिना किसी कार्रवाई के चले गए। मगर अवैध कब्जा नहीं हटा। करीब तीस फिट गहरे और बड़े व्यास के कुएं को लेकर कई बार चर्चा हुई कि मरम्मत नहीं हुई तो किसी दिन दुर्घटना हो सकती है। मगर भूरा इसमें काम नहीं कराने देता था।
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दूल्हे और बहनोई..बस तीन लोगों की बारात

दुर्घटना के बाद गांव में जहां कोहराम व अफरा-तफरी का माहौल था और बारात में जाने की तैयारियां करे बैठे लोग अपनों को बचाने में लगे थे। बस फिर क्या था, शादी वाले घर में तय हुआ कि अब बारात जाना मुश्किल होगा। इसके बाद तय हुआ कि दोनों दूल्हों को उनके बहनोई संग गाड़ी से भेज दिया जाए। वहां शादी की तैयारियां होंगी। इसके बाद जो पहुंच सकेगा, वह पहुंचेगा। अन्यथा यही लोग दुल्हनों को विदा कराकर ले आएंगे। इसके बाद तीन लोग ही बारात लेकर रवाना कर दिए गए।

सरकारी मदद से पहले निकाले सभी लोग
शाम करीब पांच बजे दुर्घटना के बाद पुलिस प्रशासन को सौ नंबर पर सूचना दे दी गई। मगर सरकारी मदद एक घंटे बाद मिली। इससे पहले गांव के ही साहसी युवकों ने रस्सी की मदद से एक-एक कर सभी को बाहर निकाल लिया और आनन-फानन उन्हें आसपास के अस्पतालों में भिजवाया। छह बजे जब प्रशासनिक अमला पहुंचा, तभी वहां व्यवस्थाएं शुरू हो सकीं और घायलों को जिला मुख्यालय लाया गया।

घर-घर में हुई बच्चों की गिनती
इस दुर्घटना के बाद हर ग्रामीण को इस बात की चिंता थी कि कहीं उनका बच्चा तो गायब नहीं है। इसे लेकर एसडीएम ने अपने साथ आए कर्मचारियों व सिपाहियों की मदद से हर घर में बच्चों की गिनती शुरू कराई। फिर मिलान कराया। कई घंटे के प्रयास के बाद साफ हुआ कोई बच्चा लापता नहीं है। जो बच्चा घायल है, वही घर पर मौजूद नहीं है।

सासनी के अस्पताल में हुआ हंगामा
गांव से सबसे पहले घायलों को सासनी के एक नर्सिंग होम ले जाया गया। जहां बच्चों के परिजन काफी संख्या में थे और इलाज की जल्दी कर रहे थे। इस दौरान डॉक्टर कुछ झल्ला गया, जिसे लेकर वहां हंगामी स्थिति हो गई। इस सूचना पर सासनी पुलिस भी वहां और मामला शांत कराया। आनन-फानन वहां से घायलों को अलीगढ़-हाथरस के लिए भेजा गया।
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