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पूर्व कैबिनेट मेंबर की गिरफ्तारी पर भड़क उठे छात्र

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बीते वर्ष नवंबर माह में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) प्रॉक्टर कार्यालय पर हुई फायरिंग में नामजद पूर्व कैबिनेट मैंबर सद्दाम हुसैन की गिरफ्तारी ने कैंपस का माहौल गरम कर दिया। बुधवार रात तीन बजे से सिविल लाइंस थाने पहुंची भीड़ ने हंगामा करते हुए छात्र नेता की को छोड़े जाने की जिद शुरू की और बृहस्पतिवार दुपहर तक मामला एसएसपी दफ्तर पहुंच गया।
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छात्रों की भीड़ ने दबाव इतना बना दिया कि सभी गिरफ्तारी देने को तैयार हो गए। बाद में उनके द्वारा दी गई आंदोलन की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन व एएमयू इंतजामिया के मध्य बनी रणनीती के बाद शाम चार बजे बीमारी की आड़ में सद्दाम को जमानत पर रिहा कर दिया गया। तब जाकर पुलिस ने राहत महसूस की।

एएमयू की जमीन के आवंटन के विरोध में छात्रों ने 7 नवंबर 2015 की शाम एएमयू के प्रशासनिक ब्लाक के बाहर प्रदर्शन किया था। जहां प्रॉक्टर के साथ मौजदू लोगों द्वारा फायरिंग की गई थी। इस फायरिंग के विरोध में गुस्साए छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया था और देर रात प्रॉक्टर कार्यालय पर फिर प्रदर्शन के दौरान फायरिंग हुई थी। इस प्रकरण में दोनों ओर से मुकदमे दर्ज हुए। एक मुकदमा प्रशासनिक ब्लाक पर फायरिंग का और दूसरा प्रॉक्टर कार्यालय पर फायरिंग का।
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बीमारी की आड़ में दी गई थाने से ही जमानत

प्रॉक्टर कार्यालय पर हुई फायरिंग का मुकदमा सुरक्षाकर्मी मो.फारुख ने पूर्व कैबिनेट सद्दाम हुसैन निवासी नदरौली गुन्नौर संभल हाल निवासी गोल मार्केट जमालपुर सहित कई लोग नामजद थे। सद्दाम को मुकदमा दर्ज होने के बाद निलंबित कर दिया गया था। तभी से वह फरार चल रहा था।

बुधवार रात एसएसपी के निर्देश पर वांछितों के खिलाफ चले गिरफ्तारी अभियान में उसे दबोच लिया गया। रात करीब दो बजे उसकी गिरफ्तारी की खबर जैसे ही छात्रों व समर्थकों तक पहुंची तो तमाम छात्रों की भीड़ सिविल लाइंस पहुंच गई। उस समय पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शहजाद आलम,छात्र नेता आशू आदि पहुंच गए।

उस समय तो जैसे तैसे उन्हें थाने से टहला दिया गया। मगर दिन निकलते ही फिर छात्रों की भीड़ थाने पहुंच गई। इस बार इंस्पेक्टर सिविल लाइंस से जमकर नोकझोंक हुई। बाद में छात्र चेतावनी देकर चले गए। इसके बाद दुपहर में एसएसपी दफ्तर पहुंच गए। जहां बाहर छात्र जमा रहे और अंदर प्रतिनिधि मंडल एसएसपी से मिला।

जहां सद्दाम समर्थकों ने तर्क के साथ उसे झूठा फंसाए जाने की बात रखी। तब जाकर तय हुआ कि मामले में पहले इंतजामिया से तर्क लिया जाए। इसके बाद रिहाई तय होगी। चूंकि छात्र बेहद उग्र थे। इसलिए शाम को अंदरखाने सभी से सहमति बनने पर चार बजे सद्दाम को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया। हमले के मुकदमे में जमानत पर रिहाई की पुष्टि इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेद्वी ने की है।
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