मनरेगा में घोटालों के ढाई हजार से अधिक मामले पकड़ में आए हैं। केंद्र ने इन सभी मामलों में जांच के निर्देश दे दिए हैं। घोटालों की गंभीर शिकायतों के मामलों में निगरानी समिति के गठन का भी निर्णय लिया गया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को सीधे मिली कई शिकायतें कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य सरकारों के भेज दी गई हैं। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक एक हजार से अधिक घोटाले सामने आए हैं।
देश के 31 राज्यों में मनरेगा में फंड के दुरुपयोग संबंधी 875 शिकायतें मिली हैं। राशि के गबन के बारे में 689 और अन्य अनियमितताओं से संबंधित 577 मामले पकड़ में आए हैं। मजदूरी का भुगतान नहीं करने संबंधी शिकायतों की संख्या 250 है जबकि भुगतान में गड़बड़ियों के 160 मामले उजागर हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में मनरेगा के फंड के दुरुपयोग के 400 मामले पकड़ में आए हैं। इसके अलावा मजदूरी का भुगतान नहीं करने के 92 और भुगतान में अन्य गड़बड़ियों के 26 मामले जांच में हैं। भ्रष्टाचार के 301 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा अन्य अनियमितताओं के 362 मामलों समेत उत्तर प्रदेश शिकायतों के मामलों में सबसे ऊपर है। उप्र में मनरेगा की गड़बड़ियों के 1,181 मामले उजागर हुए हैं।
घोटालों की समीक्षा कर रहा है ग्रामीण विकास मंत्रालय
इसी तरह बिहार में 249, मध्य प्रदेश में 418, हरियाणा में 112, हिमाचल
प्रदेश में 37, उत्तराखंड में 21 और पंजाब में घोटालों के 13 मामले पकड़
में आए हैं। देश में ऐसी गड़बड़ियों की संख्या 2,555 है। कई मामलों में
जमीनी स्तर पर काम ही नहीं हुआ और फाइलों में मजदूरी का भुगतान दिखा दिया
गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सभी तरह की शिकायतों के मामले अपनी
रिपोर्ट समेत ब्योरा राज्य सरकारों को भेजा है।
इस वित्त वर्ष के समाप्त होने में सिर्फ 49 दिन ही शेष रह गए हैं। लिहाजा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय घोटालों के सभी मामलों में कार्रवाई के संबंध में राज्य सरकारों के साथ समीक्षा कर रहा है। मनरेगा में कम मजदूरी, भुगतान में विलंब, दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जाना, भ्रष्टाचार और पक्षपात संबंधी शिकायतें मिल रही हैं। मंत्रालय की ओर से मनरेगा में अनियमितता समाप्त करने के लिए मूल्यांकन अध्ययन तथा सामाजिक लेखा परीक्षा जैसे माध्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक मनरेगा में शिकायतों के शीघ्र निस्तारण के लिए जिला स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति की गई है। जन शिकायत पोर्टल के जरिए भी घोटालों की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। मंत्रालय ने मनरेगा की प्रगति के बारे में स्वतंत्र एजेंसियों से भी मूल्यांकन कराया है। इसकी रिपोर्ट राज्य सरकारों के साथ भी साझा की जाएगी।