यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और रियल इस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच 58 करोड़ का ज़मीन करार रद्द करने वाले वरिष्ठ आईएएस अफसर अशोक खेमका का तबादला कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा ने 3.531 एकड़ जमीन डीएलएफ को बेची थी। आईएएस अधिकारी खेमका ने वाड्रा की कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड और डीएलएफ के बीच इस सौदेबाजी में अनियमितता पाई और इसका म्यूटेशन रद्द कर दिया था। जमीन डील रद्द करने वाले दस्तावेजों के मुताबिक जमीन बिक्री के कागजात पर अनाधिकृत अफसर के हस्ताक्षर पाए गए।
वहीं, अरविंद केजरीवाल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि हरियाणा में आईएएस अधिकारी का तबादला क्यों किया गया। क्या किसी अधिकारी का तबादला इसलिए कर दिया गया, क्योंकि उसने वाड्रा के खिलाफ जांच की। उन्होंने इस मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है।
आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने कहा कि उनका तबादला कुछ सरकारी अफसरों और बिल्डरों की साठगांठ के खिलाफ कार्रवाई करने पर किया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी में उन्होंने कहा, मैंने आरोपी अफसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी, लेकिन आरोपियों ने मेरा ही तबादला करा दिया। एक समाचार चैनल से बातचीत में खेमका ने कहा, ' या तो मैं अपनी ड्यूटी निभाऊं या फिर किसी से बना कर चलूं। सभी सरकारें एक जैसी हैं। पिछले 21 सालों में मेरा 40 बार तबादला हो चुका है।'
वहीं, आईएएस अधिकारी के तबादले को लेकर आलोचना झेल रही कांग्रेस का बयान भी आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे तबादले होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के तबादले को राजनीतिक रंग देना सही नहीं है। जगदंबिका पाल ने सवाल किया कि जानबूझकर खेमका के तबादले के पीछे कारण गिनाना कहां तक सही है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार आईएएस अशोक खेमका की ही जांच में जुट गई है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि खेमका के आरोपों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात की भी जांच होगी कि खेमका ने जो बयान दिया है, क्या वह सच है?