वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की व्यस्तता के कारण यूपी लोकायुक्त मामले की सुनवाई टालने की राज्य सरकार की गुहार पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को होने वाली सुनवाई तो टाल दी लेकिन साफ किया कि बुधवार को हर हाल में सुनवाई होगी भले ही कपिल सिब्बल उपलब्ध हों या नहीं। शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार को कहा है कि वह चाहे तो वैकल्पिक व्यवस्था करे।
न्यायमूर्ति रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह बात सही है कि वकीलों की सुविधा का ध्यान रखा जाना चाहिए लेकिन सवाल यह है कि आखिर अदालत अपना काम कैसे करे। अदालत को भी अपना काम करना है। पीठ ने कहा कि सवाल सिर्फ इस मामले का नहीं है। अदालत को अपना काम सुचारू तरीके से चलाना होगा।
वास्तव में मंगलवार सुबह सुनवाई शुरू होते ही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से मामले की सुनवाई टालने की गुहार की। सरकार का कहना था कि वरिष्ठ वकील उनकी ओर से पैरवी करेंगे लेकिन आज वह संविधान पीठ में बहस कर रहे हैं।
लिहाजा सुनवाई गुरुवार या शुक्रवार तक के लिए टाल दी जाए। इस पर पीठ ने सुनवाई को दो बजे टालते हुए सिब्बल को अदालत में आने का अनुरोध किया।
दो बजे जब एक बार फिर से सुनवाई शुरू हुई तो राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से एक बार फिर आग्रह किया कि कपिल सिब्बल अब भी व्यस्त हैं, लिहाजा सुनवाई टाल दी जाए।
राज्य के इस रुख पर जताई नाराजगी
पीठ ने राज्य सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई और कहा कि हर हाल में बुधवार को सुनवाई होगी। चाहें तो कपिल सिब्बल सरकार की ओर से पैरवी करें या कोई वैकल्पिक इंतजाम किया जाए।
कुछ समय बाद सिब्बल वहां आए और उन्होंने पीठ से गुहार की कि वह चाहे तो इस पर सुनवाई कर सकती है लेकिन अदालत ने उनके आग्रह को ठुकराते हुए कहा कि हम बुधवार की तारीख तय कर चुके हैं।
मालूम हो कि अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि लोकायुक्त मामले में यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत को गुमराह किया है।
मालूम हो कि अदालती आदेशों केबावजूद लंबे समय से यूपी में नए लोकायुक्त की नियुक्ति न होने से नाराज न्यायमूर्ति रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने गत 16 दिसंबर को अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए लोकायुक्त पद के लिए राज्य सरकार की ओर से शार्टलिस्ट किए गए पांच नामों में से एक जस्टिस वीरेन्द्र सिंह को लोकायुक्त नियुक्त कर दिया था।
संवैधानिक अथॉरिटी पर तल्ख टिप्पणी
साथ ही पीठ ने राज्य की संवैधानिक अथॉरिटी पर तल्ख टिप्पणी भी की थी। लेकिन दो दिन बाद सचिदानंद गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में यूपी सरकार ने धोखा दिया है, लिहाजा इस नियुक्ति को खारिज किया जाना चाहिए।
साथ ही याचिका में 20 दिसंबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को भी टालने की गुहार लगाई थी। जिस पर अवकाशकालीन पीठ ने शपथ ग्रहण टालने का निर्देश दिया था।
उत्तर प्रदेश ने इस आरोप को गलत बताया है कि उसने लोकायुक्त मामले में सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि उसने अदालत को यह कभी नहीं कहा था कि लोकायुक्त के लिए नामों की जो सूची दी गई थी, उन पर आम सहमति थी।
यूपी सरकार ने लोकायुक्त मामले में राज्य में विपक्ष केनेता स्वामी प्रसाद मौर्य के रुख पर सवाल उठाया है। सरकार का कहना है कि शुरुआत से ही मौर्य लोकायुक्त चयन मामले में सरकार के साथ थे लेकिन बाद में पलट गए। गौरतलब है लोकायुक्त चुनने में विपक्ष के नेता की सहमति जरूरी होती है।