बीमा बिल पर टीएमसी, वामदल, जदयू और सपा के एकसाथ विरोध में आ जाने से सरकार परेशान दिखाई दे रही।
इन पार्टियों ने चयन समिति की रिपोर्ट पर असहमति पत्र लगाने का फैसला कर लिया है। सपा को भी जदयू अपने साथ आने को मना रही है। हालांकि राज्यसभा की चयन समिति में सरकार और कांग्रेस के बीच सहमति बनने के संकेत है। बसपा के भी साथ खड़े होने की संभावना से मोदी सरकार राहत में है।
मंगलवार को चयन समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, माकपा के पी राजीव और जदयू सांसद के सी त्यागी ने बीमा बिल का जमकर विरोध किया। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने भी इसे लेकर आपत्ति जताई।
विरोधी पार्टियों का तर्क था कि इस मुद्दे पर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति ने बीमा क्षेत्र में 26 फीसदी विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने को राष्ट्रीय हित में नहीं माना था।
बैठक में कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि जब यूपीए सरकार इस बिल को लेकर आई थी तो भाजपा ने इसे बेवजह रोकने की कोशिश की। शर्मा ने बीमा बिल में एक-दो बदलाव लाने की बात कही है। माना जा रहा है कि सरकार इसके लिए तैयार है। कांग्रेस के अंदर बिल को समर्थन करने या नहीं करने को लेकर मतभेद है।