मालेगांव केस से जुड़़ी सरकारी वकील रोहिणी सालियान ने कहा है कि केन्द्र में नई सरकार बनने के बाद से उन पर आरोपियों के प्रति नरमी बरतने का दबाव डाला जा रहा है।
अंग्रेजी अखबार The Indian Express से साक्षात्कार में कहा है कि केंद्र में नई सरकार आने के कुछ दिनों बाद उन्हें एनआईए के अधिकारी की तरफ से फोन आया।
अधिकारी चाहता था कि रोहिणी उनसे मिलकर बात करें क्योंकि वह फोन पर बात नहीं करना चाहता था। रोहिणी ने बताया कि वो अधिकारी उनसे मिलने आया और उनसे कहा कि उन्हें हिन्दू उग्रवादियों के प्रति नरमी बरतनी चाहिए।
आधिकारिक तौर पर मुझे निकाले एनआईए
ये मामला इस महीने सामने आया जब बीते 12 जून को मामले की सुनवाई थी। उन्हें उसी एनआईए के अधिकारी ने फिर कहा कि उसके वरिष्ठ अधिकारी यह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से वो इस केस की सुनवाई में शामिल हों।
उनकी जगह अब सुनवाई के लिए नया वकील नियुक्त किया जाएगा। 68 वर्षीय सालियान जे.जे शूटआउट, बोरिवली जबल मर्डर, भरत शाह मर्डर केस सहित मुलुंड ब्लास्ट जैसे केस लड़े थे।
सालियान ने यह भी कहा कि उस अधिकारी का यह साफ कहना था कि हमें हमारे पक्ष में फैसला नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं यह चाहती हूं कि एनआईए मुझे इस केस से आधिकारिक तौर पर निकाल दें ताकि जरूरत पड़ने पर मैं दूसरे मामले देख पाउं।
ये है पूरा मामला
मालेगांव ब्लास्ट 29 सितंबर 2008 को हुआ था। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और 79 लोग घायल हुए थे। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ परत दर परत लोगों के नाम सामने आने लगे।
इस मामले में मुख्य आरोपी मनोहर सिंह, साध्वी प्रज्ञा, और कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित 12 लोग गिरफ्तार हुए थे। मालेगांव ब्लास्ट्स के समय ही गुजरात के मोडासा में भी ब्लास्ट हुए थे।