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तीसरा मोर्चा बना तो एनडीए-यूपीए पर पड़ेगा भारी

Thu, 13 Jun 2013 12:47 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
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मोदी विरोध के कारण उपजी नई राजनीतिक परिस्थितियों ने देश में गैरयूपीए-गैरएनडीए विकल्प की पहल का बीज डाल दिया है।
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इन दो प्रमुख गठबंधनों के सामने तीसरा विकल्प खड़ा करने को लेकर गहमागहमी शुरू हो चुकी है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बीजेडी और तृणमूल के साथ गठजोड़ की पहल के बाद गैरयूपीए-गैरएनडीए दल इस दिशा में अचानक गंभीर हुए हैं।

यह विकल्प चुनाव से पहले खड़ा हो या फिर चुनाव के बाद, मगर गैर एनडीए-गैरयूपीए दलों का संभावित मोर्चा इन दो प्रमुख गठबंधनों पर भारी पड़ सकता है।

फिलहाल तृणमूल, बीजेडी, डीएमके, जेडीएस, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, आईएनएलडी, जेवीएम, टीआरएस, सपा, बसपा, एजीपी इन दोनों प्रमुख गठबंधन में शामिल नहीं हैं।

नए मोर्चे के गठन में तेजी
अगर जदयू और भाजपा में स्थायी दूरी बनी तो नए मोर्चे के गठन में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है।

नीतीश की तृणमूल और बीजेडी के साथ गठजोड़ बनाने की पहल को पहले ही दिन जैसा सकारात्मक संदेश मिला है, उससे नए मोर्चे के गठन की संभावना को बल मिल गया है।

नीतीश, नवीन संग दीदी का नया मोर्चा
उल्लेखनीय है कि नीतीश की इस पहल को ममता बनर्जी और नवीन पटनायक ने हाथों हाथ लिया है। अगर नीतीश इस दिशा में आगे बढ़े तो तीसरे विकल्प की पहल का इंतजार कर रहे अन्य क्षेत्रीय दल साथ आने में देर नहीं लगाएंगे।
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वैसे भी ऐसे दलों की स्थिति अपने अपने राज्यों और इलाकों में मजबूत है, इसलिए इस संभावित मोर्चे की संयुक्त सीटों की संख्या यूपीए-एनडीए की सीटों की संख्या पर भारी पड़ सकती है।

दरअसल भाजपा में मोदी को नया चेहरा बनाने से पहले गैरयूपीए-गैरएनडीए दलों का एक मंच पर आना संभव नहीं दिख रहा था। हमेशा से तीसरे मोर्चे की मुहिम शुरू करने वाले वाम दल इसके प्रति शुरू से ही अनिच्छा जताते आ रहे हैं।

तीसरे मोर्चे के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे सपा के मुखिया मुलायम सिंह ने अब तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन मोदी के पर्दे पर आते ही गहमागहमी शुरू हो चुकी है।

हालांकि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि सशक्त तीसरा मोर्चा चुनाव से पहले ही आकार ले लेगा। मगर चुनाव बाद इसके निर्माण पर किसी को संदेह नहीं है।

हालांकि चुनाव बाद यूपीए-एनडीए को सत्ता से बाहर आने के लिए कई ऐसे दल भी एक छतरी में आ सकते हैं जिनका आपसी हितों के टकराव के कारण चुनाव से पहले साथ आने की संभावना नहीं दिख रही।

जयललिता को भरोसा, केंद्र में बदलेगी सत्ता
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने अगले लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में सत्ता बदलने का भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव बाद केंद्र में एक मित्र सरकार आएगी।

माना जा रहा है कि उनका इशारा नरेंद्र मोदी के केंद्र में सत्ता संभालने की ओर था क्योंकि वह कई बार मोदी को अपना दोस्त बता चुकी हैं। अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए यह भी कहा कि वह राज्य के साथ सौतेला बर्ताव कर रही है।
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मैंने नीतीश कुमार से बात की है, वह भी मानते हैं कि यदि नया मोर्चा बनाने के लिए दोनों दल साथ आते हैं यह अच्छा होगा। हम दूसरे दलों से भी बात करेंगे। मैं नवीन पटनायक से भी मिलूंगी। बाबूलाल मरांडी से भी इस बारे में बात हो चुकी है।--ममता बनर्जी, तृणमूल सुप्रीमो
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