दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 67 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी की लहर की हवा निकालकर उन्हें सिर्फ तीन सीटों पर सीमित कर दिया।
'आप' की इस भारी भरकम जीत के पीछे उन चेहरों का बहुत बड़ा योगदान है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की जीत की स्क्रिप्ट तैयार की।
ये कुछ ऐसे नाम हैं जो न तो मीडिया में दिखाई दिए और न ही 'आप' के किसी भी प्रोग्राम में उन्होंने शिरकत की। आप भी जानिए 'आप' के इन अंडरग्राउंड सिपाहियों के बारे में जिन्होंने भाजपा की लहर पर अच्छे से झाड़ू फेरने का काम किया।
पर्दे के पीछे रहे इन सिपाहियों ने दिलाई आप को बड़ी जीत
राघव चढ्ढा: पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट तीस साल के राघव चढ्ढा 'आप' की पार्टी फंडिंग से जुड़े सारे कामकाज देखते हैं। पार्टी फंडिंग की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ-साथ पार्टी में नीलामी और डिनर जैसे नवीनतम विचारों का समावेश करना चढ्ढा के दिमाग की ही उपज था।
हाल ही के दिनों में आप ने जिस तरह से भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों की फंडिंग पर सवालिया निशान लगाए थे इसके पीछे भी चढ्ढा ही थे।
इन चेहरों ने दिलाई आप को बड़ी जीत
अंकित लाल: आम आदमी पार्टी की फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर दमदार उपस्थिति के पीछे 30 साल के अंकित लाल का हाथ था। अन्ना आंदोलन के दौरान चर्चा में आने वाले इस साफ्टवेयर इंजीनियर ने जनवरी 2012 को अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़कर सोशल मीडिया के जरिए इंडिया अगेस्ट करप्शन में अपना योगदान देने का मन बना लिया।
अंकित अब उस टीम को हैड करते हैं जो पार्टी की सोशल मीडिया की हलचल पर नजर रखती है। साथ ही सोशल मीडिया पर मफलरमैन को प्रमोट करने और दिल्ली डायलॉग को चर्चा में लाने के पीछे भी अंकित का ही हाथ था।
आप की रणनीतिक टीम के प्रमुख सिपाही हैं तलवार
आशीष तलवार:आशीष तलवार आम आदमी पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक माने जाते हैं। तलवार के राजनीतिक अनुभव काफी खट्ठे मीठे रहे हैं। तलवार पहले कांग्रेस की एक विंग के सिपाहसलार थे और उन्होंने दिल्ली की गलियों और कालोनियों में जा जाकर काफी मेहनत की है।
साल 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद तलवार ने कांग्रेस को छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया था। यह तलवार का ही संगठन कौशल था जिसके दम पर केजरीवाल को वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में एक नरेंद्र मोदी के एक प्रबल प्रतिद्वंदी बनने में मदद मिली थी।
आप की जीत में इनकी है अहम भूमिका
दुर्गेश पाठक
26 साल के युवा दुर्गेश पाठक भी 'आप' की रणनीतिक टीम का अहम हिस्सा हैं।
नागेंद्र शर्मा
42 साल के नागेंद्र शर्मा आम आदमी पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में से भी एक है।
इन सिपाहियों ने भी की खूब मेहनत
आतिशी मर्लिना: अपने उपनाम को मार्क्स और लेनिन मार(एक्स)लेन(इन)ए से प्रेरित बताने वाली एक मार्क्सिस्ट की पुत्री आतिशी मर्लिना आम चुनाव 2014 के बाद आम आदमी पार्टी से जुड़ी थीं।
'आप' के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र और साल 2015 के पार्टी घोषणापत्र को तैयार करने वाली टीम के अहम सदस्यों में आतिशी का नाम आता है। सेंट स्टीफंस कॉलेज और आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की पष्ठभूमि और भारतीय गांवों में काम करने का आतिशी का अच्छा अनुभव नीतियां बनाने में आम आदमी पार्टी के काफी काम आया और वह पार्टी की तरफ से टेलिविजन में दिखने वाले चेहरों में से एक थीं।
दिलीप पांडे
दिलीप पांडे एक कुशल संगठन कर्ता माने जाते हैं। आप के प्रचार प्रबंधक दुर्गेश पाठक ने सिविल सर्विस की तैयारी छोड़कर अन्ना आंदोलन से जुड़ना मुनासिब समझा और वहीं दिलीप पांडे ने हांगकांग की एक आईटी कंपनी में काम करने को छोड़कर आप से स्वयंसेवी होकर काम करना अच्छा समझा। इन दोनों ने दरवाजे दरवाजे जाकर लोगों तक आप के विचारों को पहुंचाने का उम्दा काम किया।
आप की जीत में है इनकी बड़ी भूमिका
पंकज गुप्ता: 25 साल के साफ्टवेयर इंजीनियर पंकज गुप्ता केजरीवाल के जन लोकपाल आंदोलन से जुड़े थे। वह आम आदमी पार्टी के लिए फंड जुटाने वाली टीम के मुखिया हैं। आप के लिए फंड जुटाना काफी मुश्किल काम माना जाता है।
पार्टी ने साल 2013 के चुनाव में करीब 20 करोड़ का चंदा माइक्रोफिनांसिंग और इनोवेटिव फंडिंग के जरिए। वहीं इस चुनाव में भी पार्टी ने 18 करोड़ का चंदा जुटाया जबकि पार्टी का लक्ष्य 30 करोड़ का चंदा जुटाना था।
रिचा पांडे मिश्रा
'आप' की रणनीतिक टीम के प्रमुख सदस्यों में रिचा पांडे मिश्रा का भी नाम आता है।
राकेश सिन्हा
राकेश सिन्हा भी आम आदमी पार्टी के अंडरग्राउंड रणनीतिकारों में से एक हैं।
रिषिकेश
आम आदमी पार्टी की दिल्ली फतह में रिषिकेश का भी अहम योगदान है। वो भी 'आप' के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक माने जाते हैं।