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आगराः गांव वालों ने निकाली धर्मांतरण के आरोपों की हवा

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गांव गढ़ी संपत में 20 हिंदू परिवारों को ईसाई बनाए जाने के हल्ले के कारण सोमवार को गांव पुलिस छावनी सा बन गया था। मीडिया और हिंदूवादी नेताओं के जमावड़ा भी था। इसी बीच पूरे गांव ने एक सुर से साफ किया मामला धर्मांतरण का नहीं है। ‘ईसाई सत्संग’ में जाने से बीमारियां ठीक होने के प्रचार पर महिलाएं जरूर वहां जाती थीं लेकिन उनकी उपनी पूजा पद्धति आज भी वैसी ही है।
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रामवती ने लालच देने के आरोप से पल्ला झाड़ते हुए इसका ठीकरा हिंदूवादी नेताओं के सिर फोड़ दिया। पुलिस भी अब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने जा रही। सोमवार को गढ़ी संपत में हर ओर अजब से संशय का कोहरा था।

पुलिस की गाड़ियों, मीडियाकर्मियों और हिंदूवादी कार्यकर्ताओं की आमदरफ्त चढ़ते दिन के साथ बढ़ती रही। ग्रामीण सबको बता रहे थे, गांव परिहार के एक युवक को पथरी की शिकायत थी। कहा गया कि ‘ईसाई सत्संग’ (प्रार्थना, प्रवचन या दुआ के लिए होने वाली सभा) में जाने के बाद उसकी बीमारी दूर हो गई।
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एक सुर में बोला पूरा गांव, नहीं कराया धर्मांतरण

एक अन्य महिला का पैरों से कमजोर बच्चा भी खड़ा होकर चलने लगा। इस ‘चमत्कार’ को खूब प्रचार मिला। कुछ ही महीनों में आसपास गांव की सैकड़ों महिलाएं सत्संग में जाने लगीं। उन्हें अपने लिए भी भले की आस थी। गढ़ी संपत समेत आसपास के ज्यादातर गांवों में ईसाई मिशनरी द्वारा सत्संग और कुछ परिवारों को बाइबिल देने की बात ग्रामीणों ने मानी।

लेकिन उनका कहना था कि यह वैसा ही है जैसेदूसरे धर्म का होते हुए भी कोई किसी दरगाह पर मन्नत का धागा बांधे या गुरुद्वारे में मत्था टेके। उनका सवाल था कि इस श्रद्धा को धर्मपरिवर्तन तो कहा जा सकता है? उन्होंने बताया कि किसी भी परिवार ने अपने मूल धर्म व परंपराओं से नाता नहीं तोड़ा, न ही नाम बदला।

लालच दिए जाने की बात पर भी उनकी ना ही थी। पुलिस के मुताबिक रविवार रात जब थाने में दी गई तहरीर रामवती को पढ़कर सुनाई गई तो उन्होंने धर्मपरिवर्तन के लिए लालच देने जैसे आरोपों से इनकार कर दिया। यही बात उन्होंने ‘अमर उजाला’ से भी कही। उन्होंने साफ किया अब न तो सत्संग जाएंगी न ही वह कोई कार्रवाई करने के लिए पुलिस से कहने वाली हैं।

हिंदूवादी नेताओं के कहने पर लगा दिया अंगूठा

उधर, हिंदूवादी नेताओं के गांव पहुंचकर शुद्धिकरण हवन आदि करने की आशंका पर रामवती के घर पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। सख्ती इतनी थी कि दोपहर एक बजे तक पुलिस ने गांव में चार लोगों को भी सार्वजनिक रूप से गुट बनाकर बात नहीं करने दी।

पूर्व सांसद और भाजपा नेता एसपी सिंह बघेल, बजरंग दल के गौरक्षा प्रांत प्रमुख सुनील पाराशर, बजरंग दल के महानगर सह संयोजक दिग्विजय तिवारी, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मीडिया प्रभारी प्रमेंद्र जैन देर तक गांव में डेरा डाले रहे।

वे गांव की महिलाओं को मिशनरी सत्संग तक ले जाने की आरोपी रामवती बघेल के घर भी गए। हिंदूवादी नेताओं ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने और  रामवती को घर से गायब करने का आरोप भी पुलिस पर लगाया।
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क्रिसमस करीब, हिंदूवादी संगठन खुफिया निगरानी में

क्रिसमस जैसे-जैसे  नजदीक आती जा  रही है, वैसे-वैसे खुफिया तंत्र हिंदूवादियों  की गतिविधियों पर और ज्यादा निगरानी रख रहा है। अलीगढ़ में घर वापसी कार्यक्रम हालांकि स्थगित हो गया है लेकिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद यहां हिंदूवादी सक्रिय हो सकते हैं। इसी के चलते खुफिया तंत्र इसे लेकर सतर्क  है कि कहीं क्रिसमस के दिन कोई आयोजन तो नहीं हो रहा। इधर, कुछ हिंदूवादियों ने सोमवार को भी प्रशासन के नोटिस के जवाब में बंधपत्र नहीं भरे।

क्रिसमस के मौके पर 25 दिसंबर को अलीगढ़ में धर्म जागरण समिति ने घर वापसी के कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसे लेकर यहां के हिंदूवादियों ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी। इधर खुफिया तंत्र ने इन पर निगरानी रखनी शुरू  कर दी। इसके बाद  जब कार्यक्रम स्थगित हुआ तो प्रशासन का रुख सख्त हो गया। हर थाना क्षेत्र में हिंदूवादियों को पाबंद  कर दिया। कुछ  को नोटिस  थमा दिए गए।

छापामारी भी की गई और गांव-गांव हिंदूवादियों की हरकतों पर नजर रखने के लिए चौकीदारों के लेकर लेखपालों के जरिए सूचना का जाल बिछा दिया गया। कार्यक्रम स्थगित  होने के बाद यहां हिंदूवादी थोड़े सुस्त हो गए लेकिन मोहन भागवत के बयान ने उन्हें फिर उत्साहित कर दिया है। खुफिया तंत्र कुछ हिंदूवादियों पर निगाह रखे हुए है। उसे यह आशंका  है कि कहीं  हिंदूवादी पिछली साल की तरह यहां कोई कार्यक्रम आयोजित न कर दें।

पिछले साल भी हिंदूवादियों ने क्रिसमस के दिन यहां सरस्वती विद्या मंदिर में घर वापसी का कार्यक्रम कराया था। यहां यह भी गौरतलब है कि कुछ हिंदूवादियों को नोटिस दिए गए थे। उनमें से बजरंग दल के प्रांत सुरक्षा प्रमुख अभिषेक रंजन आर्य सहित कई ने बंधपत्र नहीं भरे थे और इसके  लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन्होंने एसडीएम के यहां भी आपत्ति दाखिल की थी। इस प्रकरण में एसडीएम सदर के यहां अब 26 दिसंबर की तिथि नियत हो गई है। इन हिंदू्वादियों ने बंधपत्र नहीं भरे हैं।
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