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पर्यटकों को लुभाएगा वाइपर द्वीप का फांसी का तख्ता

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अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के वाइपर द्वीप पर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले कई अनजाने नायकों और उन पर हुए अत्याचार की कहानियां छुपी हुई हैं। द्वीपसमूह प्रशासन अब उन गाथाओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने जा रहा है। इसके लिए परियोजना तैयार की गई है।
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सेल्यूलर जेल के निर्माण से पहले ब्रिटिश वाइपर द्वीप को खुली जेल के तौर पर इस्तेमाल करते थे। अंग्रेजों ने 1864-67 में इस जेल तथा फांसी के तख्ते का निर्माण किया था। द्वीप में एक पहाड़ी की चोटी पर वह फांसी का तख्ता अब भी मौजूद है। यहां अपराधियों और स्वतंत्रता सेनानियों को रखा जाता था। इस दौरान यहां कई कैदियों को मौत की सजा दी गई थी।
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फांसी के बाद समुद्र में फेंक देते थे

1872 में तत्कालीन वायसराय लार्ड मेयो की हत्या करने वाले शेर अली को भी यहीं फांसी पर लटकाया गया था। बताया जा रहा है कि फांसी के बाद मृतकों को समुद्र में फेंक दिया जाता था। 1906 में पोर्ट ब्लेयर में सेल्यूलर जेल बनने तक इसका इस्तेमाल होता रहा।

फिलहाल यह द्वीप अब एक पर्यटन स्थल के रूप में बदल गया है। यहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी घूमने आते है। यहां पोर्ट ब्लेयर से समुद्री जहाज के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस द्वीप का प्राकृतिक नजारा काफी सुंदर है जिसकी वजह से पर्यटक यहां खींचे चले आते हैं।
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