यह देखते हुए कि पत्नी स्तर कैंसर से पीड़ित है सुप्रीम कोर्ट ने एक दंपति को आपसी सहमति के बाद भी तलाक की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने पति को याद दिलाया कि पत्नी की देख-रेख करना उसकी जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पति से कहा कि पहले वह अपनी पत्नी का इलाज कराए फिर तलाक के बारे में सोचे। यह आदेश एक व्यक्ति द्वारा यह दावा करने केबाद दिया कि उसके और उसकी पत्नी ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया है और पत्नी के साथ हुए करार के तहत वह साढ़े बारह लाख रुपये देने को तैयार है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि एक पति के लिए पत्नी की देखभाल करना उसका पवित्र कर्तव्य है। पीठ ने यह भी महसूस किया कि पति-पत्नी के बीच हुए इस करार में प्रभावित करने की बू आ रही है।