सुनने में आपको ये थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन एनडीए की नई सरकार में ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है। जहां किसी मुद्दे पर बनाया गया नियम उस सरकार के बाकी मंत्रियों के लिए अलग है और प्रधानमंत्री के लिए अलग।
इस मुद्दे पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने मंत्रियों को निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में वही नियम खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बदल दिया गया।
ये पूरा मामला मंत्रियों के निजी स्टाफ की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है।
निजी स्टाफ की नियुक्ति का मामला
दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक निर्देश के मुताबिक कोई भी मंत्री अपने निजी स्टाफ में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति नहीं करेगा, जो यूपीए सरकार में अहम पद पर कार्य कर चुका है।
इसके लिए बाकायदा पीएमओ से एक पत्र केंद्रीय मंत्रियों को भेजा गया है।
ये मामला उस समय सामने आया जब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने निजी सचिव के तौर पर आलोक सिंह को शामिल करना चाहते थे। आलोक सिंह 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के निजी सचिव के तौर पर काम किया था।
पीएमओ ने जारी किए निर्देश
इसी तरह गृह राज्य मंत्री किरेण रिजीजू ने अभिनव कुमार और विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह राजेश कुमार को अपना निजी सचिव बनाने की योजना थी, लेकिन उनकी नियुक्ति को बाद में रोक दिया गया।
ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों ही अधिकारी यूपीए सरकार में भी कार्यरत थे।
जहां एक ओर इन मंत्रियों को पीएमओ के नियम के मुताबिक निजी सचिवों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। दूसरी ओर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ये नियम लागू नहीं किया गया।
टोपनो बने मोदी के निजी सचिव
प्रधानमंत्री मोदी के निजी सचिव के तौर पर राजीव टोपनो की नियुक्ति की गई है।
राजीव टोपनो, मनमोहन सिंह सरकार में पीएमओ में निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। टोपनो 1996 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
इस नियुक्ति के बाद एक बात तो साफ हो गई कहीं ना कहीं मोदी के नेतृत्व में बनी नई सरकार में दूसरे मंत्रियों के लिए अलग नियम है, वहीं खुद प्रधानमंत्री मोदी के लिए ये अलग बिल्कुल अलग है।