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सोने का बंगला, चांदी का जंगला

Mon, 12 May 2014 05:24 PM IST
वैभव दीवान/बीबीसी संवाददाता, मुंबई
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'कहां रहते हो?' मुंबई में यह सवाल अक्सर 'तुम्हारा नाम क्या है?' से पहले आता है।
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जिस तरह देश के कई हिस्सों में लोग आपका पूरा नाम इसलिए पूछते हैं, ताकि आपकी जाति जान सकें, उसी तरह मुंबई में लोग पता इसलिए पूछते हैं, ताकि आपकी हैसियत का अंदाज़ा मिल सके।

पॉश माने जाने वाले वर्सोवा में सात बंगला इलाक़े में एक आलीशान बंगले में रहते हैं 82 वर्षीय कुलदीप चंद जैन। ये इनका पुश्तैनी बंगला है, जिसकी क़ीमत बाज़ार में 100-125 करोड़ तक आंकी जा रही है।
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वे बताते हैं, "यूं तो इस इलाक़े का नाम सात बंगला है, पर अब यहां कोई बंगला बचा नहीं है, सिर्फ़ एक मेरा ही बंगला है। सब बंगले और बाग़ कट-कटकर यहां 10-10 माले की बिल्डिंग बन गई हैं।"

दक्षिण मुंबई का जलवा

कुलदीप जैन के बंगले में जो बाग़ था, उसे काटकर उन्होंने भी एक बिल्डिंग वहां बनवाई है, जिसमें उनके रिश्तेदार रहते हैं। इसी बिल्डिंग की नौवीं मंज़िल से मड आइलैंड से लेकर दक्षिण मुंबई तक का नज़ारा दिखता है।

कुलदीप कहते हैं, "समुद्र से आती ठंडी हवा के साथ-साथ हर रोज़ सूर्योदय और सूर्यास्त का नज़ारा यहां से अच्छा और कहीं से नहीं दिखता। अगर यहां रहना है तो तीन कमरों का सी-फ़ेसिंग फ्लैट आपको 15 से 20 करोड़ रुपए में मिलेगा।"

मुंबई में प्रॉपर्टी की ऊंची क़ीमत सिर्फ़ आलीशान इमारतों की ही नहीं है, कुलदीप जैन की खिड़की से जो झुग्गियां दिखती हैं उनकी क़ीमत भी 20-25 लाख रुपए तक बताई जाती है क्योंकि वो समुंदर के किनारे हैं।

बंगले वाले वोटर

पुश्तैनी बंगले की तरह ही कुलदीप चंद जैन एक पारिवारिक कारोबार का हिस्सा रहे हैं। अपने भाइयों के साथ शुरू की गई लायन पेंसिल नामक कंपनी में हिस्सेदार थे। कुलदीप जैन पिछले 60 साल से वोट देते आए हैं।

मुंबई के नेपियन सी इलाक़े में पिछले 10 सालों में प्रॉपर्टी बाज़ार 100 फ़ीसदी बढ़ा है। आजकल दक्षिण मुंबई के इस इलाक़े में 90 हज़ार रुपए से सवा लाख रुपए प्रति वर्ग फ़ुट बिकता है। दक्षिण मुंबई में रहने का अलग ही चाव है।

इस इलाक़े में पिछले कई साल से अनिवासी भारतीयों का निवेश बढ़ने लगा है। गोल्डन ट्राएंगल कहलाए जाने वाले मालाबार हिल, अलमॉन्ट रोड और ब्रीच कैंडी इलाक़े में एक से बढ़कर एक महंगी प्रॉपर्टी है।

यहां खुला मैदान कहीं नहीं हैं और जो भी बंगले थे उन्हें तोड़कर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बन गई हैं। पिछले कुछ साल में मुंबई के इस क्षेत्र में घरों की मांग बढ़ी है। मुंबई में 15 लाख घरों की ज़रूरत है पर एक लाख से 50 हज़ार यूनिटें ही उपलब्ध हैं। मगर साल में 40 हज़ार भी नहीं बिकते।

मुंबई के प्रॉपर्टी बाजार में खलबली

ख़ुद को पक्का कांग्रेसी बताने वाले कुलदीप कहते हैं कि "कांग्रेस ने काफ़ी फ़ायदा दिया है देश को। ये बात नहीं है कि सिर्फ़ हमेशा अच्छा ही होगा, एक सरकार में अच्छा बुरा दोनों होता है, पर पिछले कुछ सालों में जो खराबियां पैदा हुई हैं, उन्हें देखकर अब अपने मुल्क को अच्छे हाथों में जाना चाहिए"।

कुलदीप चंद जैन का ये बंगला 65 साल पुराना है। वो बताते हैं कि उनके पिता यहां 65 साल पहले अमृतसर से आए थे।

वो कहते हैं, "मेरे पास बंगला है, फ्लैट है, पैसा है पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं वोट नहीं डालूंगा। मैं वोट इसीलिए डालूंगा ताकि आने वाली सरकार देश में चल रहे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कुछ कर सके।"

मुंबई में महंगी बिकने वाली प्रॉपर्टी मीडिया की नज़रों से बच नहीं सकती। दो साल पहले नेपियन-सी रोड इलाक़े में बिका 39 करोड़ का फ्लैट जिसने मुंबई के प्रॉपर्टी बाज़ार में खलबली मचा दी।

निवेश का अच्छा साधन

इसके बाद मुंबई का नाम न्यूयॉर्क, पेरिस और लंदन जैसे महंगे प्रॉपर्टी बाज़ारों के साथ लिया जाने लगा। ये प्रॉपर्टी मुंबई के नामी बिल्डर भीमजियाणी की थी।

अंशुल भीमजियाणी बताते हैं, "जो पैसा मैंने उस फ्लैट को बेचकर कमाया, वो मैंने अपने अगले घर, जो वर्ली में तैयार हो रहा है, उस पर लगाया। मैं कोई पैसा घर तो लेकर नहीं गया। उस प्रॉपर्टी के बिकने का कारण था ग्राहक की डिमांड– वो वहीं उस बिल्डिंग में घर बसाना चाहते थे और मुंह-मांगी क़ीमत देने को राज़ी थे, तो हमने भी अपनी प्रॉपर्टी अच्छे दाम में बेच दी, मेरी किस्मत अच्छी थी"।

लेकिन साथ ही वो यह भी कहते हैं, "आप मुंबई के सभी इलाक़ों की तुलना लंदन या न्यूयॉर्क के प्रॉपर्टी बाज़ार से नहीं कर सकते, यहां पांच-छह जगहें ही ऐसी हैं, सारी लोकेशन ऐसी नहीं हैं"।

भीमजियाणी का कारोबार मुंबई से सटे ठाणे इलाक़े में है। वहां इनकी कई बिल्डिंगें तैयार हो रही हैं।

2005 के बाद बढ़ा निवेश और क़ीमतें

कारोबार चलाने वाले अंशुल मानते हैं, "मुंबई एक टापू है, जहां डिमांड अधिक और सप्लाई की कमी हमेशा से रही है। यहां घर बनाना देश के बाक़ी शहरों के मुक़ाबले काफ़ी मुश्किल है क्योंकि न यहां जगह है, और न ही कोई स्थिर नियम और क़ानून।"

चुनावों को लेकर अंशुल काफ़ी उत्साहित दिखे। वह चुनाव के दौरान दुबई जाने वाले थे, पर उन्होंने अपने एक वोट के लिए अपने जाने की तारीख़ बदल ली है।

15 साल से वोट डालने वाले अंशुल कहते हैं कि "देश में काफ़ी समस्याएं हैं, लोकतंत्र में आम आदमी के लिए पांच साल में सिर्फ़ एक बार ऐसा मौक़ा मिलता है। अगर आप वोट नहीं देते, तो आपको हक़ नहीं है अपना दुखड़ा रोने का।"

अंशुल कहते हैं कि "बेशक मैं अमीर हूं, पर जब टूटी सड़क पर मैं निकलता हूं, तो मुझे फ़र्क पड़ता है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए मैं भी अच्छी सहूलियतें चाहता हूं। कल को अगर महँगाई बढ़ गई, तो जैसे एक ग़रीब को फ़र्क पड़ेगा, वैसे ही मुझे भी"।

अंशुल चाहते हैं कि सब लोग वोट दें और एक ऐसी सरकार आए जो पांच साल चले। पिछले कुछ सालों से चल रही सरकार के बारे में अंशुल मानते हैं, "यह सरकार फ़ैसला करने से डरती थी। यह बस चल रही थी। आने वाले चुनाव में मैं चाहूंगा कि ऐसी सरकार हो जो फ़ैसले ले, जिसकी निर्णय शक्ति मज़बूत हो"।
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सोने में निवेश से बेहतर है प्रॉपर्टी

मुंबई की बढ़िया से बढ़िया प्रॉपर्टी पर नज़रें जमाकर बैठे हैं सुनीत गांधी। सुनीत स्पेसेज़ एंड बियॉन्ड नाम की कंपनी के प्रॉपर्टी सलाहकार हैं और उनके पास कई बड़े सौदों के लिए ग्राहक-विक्रेता हैं।

सुनीत कहते हैं कि "मुंबई में आपके घर का पता सबसे अहम है। आपकी हैसियत का स्टेटमेंट है आपका एड्रेस।"

सुनीत कहते हैं,"अगर आपके पास पैसा है और आप निवेश करना चाहते हैं तो प्रॉपर्टी ही एक ऐसा ज़रिया है जिससे आप सबसे ज्यादा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। आपके पास अगर एक करोड़ रुपए हैं और आप उसे बैंक में फ़िक्स डिपॉज़िट में डाल दें, तो आपको आठ से 10 प्रतिशत ब्याज मिलेगा पर प्रॉपर्टी आपको 20 से 25 प्रतिशत रिटर्न देती है"।

मौजूदा चुनाव को महत्वपूर्ण बताते हुए सुनीत कहते हैं, "हमने ही सरकार को भ्रष्ट बनाया है। अपना काम निकालने के लिए हमें दो चार रुपए ऊपर-नीचे देने पड़ते हैं। अगर ऐसी सरकार आए जो भ्रष्ट न हो तो हम उस पैसे को बचा पाएंगे। हमारा वोट चीज़ें बदल सकता है, सरकार बदल सकता है। प्रॉपर्टी बिज़नेस के लिए एक अच्छी सरकार का आना ज़रूरी है, जो प्रॉपर्टी बाज़ार में नियम और क़ानूनों पर ध्यान दे।"
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