बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले का बहुचर्चित उत्पाद मैगी २ मिनट नूडल्स का मसला अब और पेचीदा हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस कंपनी के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज कराये जाने के बाद अब केन्द्र सरकार भी इसकी जांच करेगी। उसका कहना है कि इस उत्पाद के सैंपल विभिन्न राज्यों से लिये जाएंगे और केन्द्रीय एजेंसी इसकी जांच करेगी।
यदि उत्पाद में कुछ खामी पाई जाती है तो केन्द्र सरकार अपने स्तर पर कार्रवाई करेगी। दूसरी तरफ सामाजिक सरोकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ इस उत्पाद पर सीमित प्रतिबंध लगाने की मांग की है बल्कि इसका प्रचार करने वाले नामचीन अभिनेताओं को भी दंडित करने को कहा है।
एफएएसएआई क्या करेगी
केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामबिलास पासवान ने यहां सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उन्होंने फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) को इस बारे में लिखा है। एफएसएसएआई ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। हालांकि उन्होंने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि मंत्रालय को अभी तक किसी उपभोक्ता से इस उत्पाद के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली है।
एफएएसएआई क्या करेगी, इसकी विवेचना करते हुए मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव जी. गुरूचरण ने बताया कि यह एजेंसी सभी राज्यों से इस उत्पाद के सैंपल उठा रही है और उसकी जांच चल रही है।
कुछ रिपोर्ट तो सोमवार को ही मिल जाने की आशा है जबकि सभी राज्यों की रिपोर्ट अगले दो-तीन दिन में मिल जाएगी। यदि उत्पाद में कहीं कोई कमी-बेशी पाई जाएगी तो उसी हिसाब से कार्रवाई होगी।
मैगी टू मिनट नूडल्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की तरफ से वहां की एक निचली अदालत में नेस्ले के साथ-साथ सिने कलाकार अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित और प्रीति जिंटा के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि जांच के दौरान इस उत्पाद में स्वाद बढ़ाने वाला रसायन मोनोसोडियम ग्लुटामेट और सीसा (लेड) तय मानक से 17 गुना ज्यादा पाया गया था। अमर उजाला ने इस बारे में नेस्ले का पक्ष जानने का भी प्रयास किया। उसके प्रवक्ता ने बताया कि ईमेल के जरिये सवाल मंगवा लिया लेकिन खबर लिखे जाने तक उसका कोई जवाब नहीं मिल पाया है।
इस बीच सामाजिक सरोकार के लिए लडऩे वाले कार्यकर्ताओं ने मैगी टू मिनट नूडल्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग शुरू कर दी है। जम्मू के आरटीआई कार्यकर्ता रमन शर्मा ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को पत्र लिख कर कहा है कि इस उत्पाद को तुरंत स्कूल एवं अस्पतालों के कैंटीन में प्रतिबंधित किया जाए।
लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने तो इस उत्पाद का विज्ञापन करने वाले सिने कलाकारों पर भी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि ये नामचीन लोग खुद तो इस उत्पाद को खाते नहीं हैं जबकि दूसरों को खाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका कहना है कि खामी सरकारी तंत्र में भी है। किसी उत्पाद को जब अनुमति देनी होती है तभी जांच होती है और उसके बाद सब सुस्त पड़ जाते हैं। यदि उत्पादों की नियमित जांच हो तो ऐसी नौबत आए ही नहीं।