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अफजल की कहानी के बहाने घाटी में युवाओं को बहका रहे आतंकी

Thu, 13 Aug 2015 01:08 PM IST
गुंजन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जम्मू-कश्मीर में घाटी के नौजवानों के आतंकी संगठनों की तरफ तेजी से बढ़ते कदम को अफजल गुरु इफेक्ट माना जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पिछले दो साल में घाटी के युवाओं की आतंकवाद में शामिल होने की तेजी से बढ़ती घटना के पीछे अफजल गुरु की फांसी और कथित तौर पर न्याय नहीं मिलने संबंधी प्रोपगंडा का बड़ा रोल है।
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9 फरवरी 2013 को संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को बिना उसके परिवार को सूचित किए दी गई फांसी के बाद खुफिया एजेंसियों ने सरकार को इसके नकारात्मक असर के बारे में आगाह किया था।

सुरक्षा एजेंसी के उच्चपदस्थ सूत्र ने अमर उजाला को बताया है कि गुरु की फांसी के बाद उसके गांव दूआबग और शहर सोपोर में जिस तरह की प्रतिक्रिया हुई उससे साफ हो गया था कि एक से दो साल के भीतर इसका असर दिखने लगेगा।
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भारत से बदले की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक खुफिया विभाग का वह डर अब सच साबित हो रहा है। कश्मीर रेंज के आईजी स्तर के पुलिस अधिकारी ने फोन पर बातचीत में  बताया कि हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तोयबा नौजवानों को अफजल पर दिल्ली के किए गए कथित जुल्म की कहानी सुनाकर भारत से बदले के लिए तैयार कर रहा है।

दो साल की कोशिशों के बाद अब आतंकवाद में स्थानीय युवाओं की संख्या विदेशी आतंकवादियों को पार कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक कश्मीर पुलिस के कम से कम दो कर्मियों के भी आतंकी संगठन में शामिल होने का मामला सामने आया है।

उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुडा ने जानकारी दी है कि सेना के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल घाटी में स्थानीय नौजवानों की संख्या 60 थी।
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सरकार के कई फैसलों का इस्तेमाल भड़काने के लिए

लेकिन इस साल जुलाई में ही नए शामिल होने वाले लड़को की संख्या 35 हो गई है। एजेंसी सूत्रों के मुताबिक ऐसे लड़कों की असल संख्या मौजूदा आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

दो साल पहले तक घाटी में विदेशी और स्थानीय आतंकियों का अनुपात 60:40 था लेकिन अब यह आंकड़ा बिल्कुल उलट गया है। सूत्रों के मुताबिक लड़कों को मानसिक तौर पर तैयार करने वाले आतंकी गुर्गे अफजल गुरु को उसके परिवार को खबर किए बिना फांसी पर लटका देने को उदाहरण के तौर पर पेश करते हैं।

उनका कहना है कि ऐसा कर दिल्ली की सरकार ने अफजल की पत्नी और उसके 13 साल के बेटे से सुप्रीम कोर्ट में आखिरी गुहार लगाने का हक छीन लिया।

इसके अलावा अफजल को तिहाड़ जेल के भीतर ही दफना देने के सरकार के फैसले का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। गौरतलब है कि इसी तरह 1984 में मकबूल बट नाम के कश्मीरी आतंकी को तिहाड़ में ही फांसी के बाद दफना दिया गया था।

पाकिस्तानी एजेंसियों तब हिजबुल मुजाहिद्दीन और जेकेएलएफ के जरिए आतंकवाद की तरफ सैकड़ों कश्मीरी लड़कों को खींचा था।
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