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कैसे हुई थी मैगी के बुरे दिनों की शुरुआत, लगा था बैन

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बांबे हाईकोर्ट ने मैगी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। 'टू मिनट्स नूडल्स' के बतौर मशहूर मैगी के बुरे दिनों की शुरुआत मई में हुई थी।
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मई के आखिर में उत्तर प्रदेश में मैगी के सैंपल में तय मात्रा से अधिक सीसा पाए जाने के बाद पाबंदी लगी। इसके बाद देखते ही देखते एक के बाद एक कई राज्यों ने मैगी पर पाबंदी लगा दी। 5 जून को देश भर में मैगी पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

आरोप लगा कि मैगी में सीसा तय सीमा से ज्यादा है। मैगी की निर्माता कंपनी नेस्ले ने उत्पाद पर ‘नो एडेड एमएसजी’ का लेबल लगाकर कर गुमराह किया है। नेस्ले पर ये आरोप भी लगा कि मैगी ओट्स मसाला नूडल्स विद टेस्टमेकर की बिक्री बिना मंजूरी के की जा रही है।
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प्रतिबंध से मैगी को तकरीबन 320 करोड़ रुपए का नुकसाना हुआ। केंद्र सरकार ने मंगलवार को नेस्ले के खिलाफ अनुचित व्यापार व्यवहार में संलिप्त होने, गलत लेबलिंग और मैगी नूडल्स के संबंध में भ्रामक विज्ञापन दिखाने के कारण 640 करोड़ रुपए हर्जाने का मुकदमा भी दर्ज कराया था।
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‌सीएफटीआरआई की जांच में पास हुई मैगी

मैगी को एफएसएसएआई द्वारा मान्यताप्राप्त सेंट्रल फूड टेक्नोनोलॉजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीएफटीआरआई) ने देश के खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाया था, जिसके बाद ये संभावना बढ़ गई ‌थी कि मैगी की अच्छे दिनों की वापसी हो सकती है।

गोवा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने सीएफटीआरआई को पांच नमूने जांच के लिए भेजे थे। गोवा एफडीए के निदेशक सलीम एक वेलजी ने उस समय बताया था कि सीएफटीआरआई की जांच में पाया गया कि भेजे गए नमूने खाद्य सुरक्षा और मानक नियम, 2011 के मानकों को पूरी करते हैं।

हालांकि उस रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने कहा था कि मैगी को अब तक क्लीन चिट नहीं दी गई है। मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नेस्ले इंडिया ने दूकानों और स्टोर से मैगी वापस ले ली थी। एफएसएसएआई ने भी मैगी नूडल्स को ‘असुरक्षित और हानिकारक’ बताते हुए इसे प्रतिबंधित कर दिया था
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