अफजल गुरू की आखिरी चिट्ठी पढ़कर उसकी पत्नी तबस्सुम और परिवार के अन्य सदस्य रो पड़े। अफजल ने यह चिट्ठी फांसी के फंदे की ओर ले जाए जाने के एक घंटा पहले लिखी थी। तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से भेजी गई चिट्ठी पिछले सप्ताह अफजल गुरू के परिजनों को मिली। हालांकि परिवार ने कई दिनों ने तक इसे नहीं खोला।
बीबीसी से हुई बातचीत में अफजल के भाई यासीन गुरू ने बताया, "जब चिट्ठी मिली तो मेरी भाभी (अफजल गुरू की पत्नी) बहुत सदमे में थी। इसलिए हमने चिट्ठी को कुछ दिनों तक खोला ही नहीं। जब दो चार दिन बाद वो थोड़ा सामान्य हुईं तो उन्होंने ही ये चिट्ठी खोली।" यासीन ने बताया कि चिट्ठी खोलने के बाद परिवार के सभी सदस्य रो पड़े।
अफजल के परिजनों ने उसकी ये चिट्ठी मीडिया को सौंप दी है। अफजल की इस चिट्ठी में सबसे ऊपर बाईं ओर समय लिखा– सुबह के 6:25। लेकिन चिट्ठी के अंत में न तो अफजल का नाम हैं और न ही उसके दस्तखत। हालांकि उसके परिजनों का कहना है कि चिट्ठी का हस्तलेख अफजल गुरू से बिलकुल मिलता है।
चिट्ठी में अफजल ने परिजनों को उसकी मौत का शोक न मनाने को कहा है। आठ लाइन के खत में अफजल ने लिखा है कि मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप मेरी मौत पर दुख न जताएं बल्कि उन्हें इस महानता का सम्मान करना चाहिए।
अफजल के परिवार ने रविवार शाम को उर्दू में लिखे खत को ईमेल के जरिए मीडिया कार्यालयों और सोशल नेटवर्किंग साइट पर जारी किया है। यह खत 9 फरवरी को सुबह 6:25 बजे लिखा गया। इसमें अफजल ने लिखा है कि मैं अल्लाह का करोड़ों बार शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उसने इस शहादत के लिए मुझे चुना।
अफजल ने लिखा है कि मैं अल्लाह के सभी बंदों को बधाई देना चाहता हूं कि हम पूरे वक्त सच्चाई के साथ टिके रहें और मेरी मौत भी सच्चाई के लिए हो रही है। अल्लाह हमारा रक्षक और मददगार है। मैं आप सभी को अल्लाह की हिफाजत में छोड़कर जा रहा हूं।