हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिका में उन्होंने पूर्व महिला इंटर्न द्वारा उन पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर मीडिया को रिपोर्टिंग करने से रोकने की मांग की है।
इसके अलावा उनकी मानहानि करने के लिए दो अंग्रेजी समाचार चैनलों और एक अंग्रेजी दैनिक से पांच करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की भी मांग की है। वहीं चैनलों ने निष्पक्ष रिपोर्टिंग का तर्क रखा है।
न्यायमूर्ति ने इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत बृहस्पतिवार को अपना फैसला देगी कि इस मामले की मीडिया में रिपोर्ट किया जाए या नहीं।
स्वतंत्र कुमार की और से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.के.कौल, मनिन्द्र सिंह के अलावा काफी संख्या में वरिष्ठ वकील पेश हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इलेक्ट्रोनिक चैनल और समाचार पत्र उनके मुवक्किल को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने कहा पूर्व महिला इंटर्न ने यौन शोषण के जो आरोप लगाए है वे बेबुनियाद व झूठे है।
उन्होंने कहा उनके मुवक्किल का रिकार्ड काफी साफ रहा है और पूरे प्रकरण में जिस प्रकार तूल दिया जा रहा है उससे उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा नष्ट हुई है।
इससे पूर्व उन्होंने प्रात: साढ़े दस बजे न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी के समक्ष दीवानी याचिका दायर करते हुए मीडिया ट्रायल पर रोक लगाने व दो चैनलों व एक अंग्रेजी समाचार पर मानहानि का आरोप लगाते हुए पांच करोड़ रुपये दिलवाने की मांग की।
उधर, चैनल के अधिवक्ता ने कहा हमने निष्पक्ष रिपोर्टिंग की है और आगे भी जारी रखेंगे। अदालत ने उनसे पूछा कि निष्पक्ष का मापदंड कैसे तय किया गया है।
अधिवक्ता ने कहा हमने अपनी तरफ से कुछ नहीं दिखाया बल्कि जो भी इंटर्न ने शपथपत्र में कहा है उसे ही दिखाया गया है।
इस प्रकार मानहानि नहीं बनती। उन्होंने कहा यदि अदालत चाहती है तो हम अब शपथपत्र का हवाला नहीं देंगे लेकिन अदालत में जो सुनवाई चल रही है उसे दिखाया जाएगा। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा हमें नहीं मालूम के इंटर्न द्वारा दिया शपथपत्र कैसे लीक हुआ है।
इंटर्न के अनुसार कथित उत्पीड़न मई 2012 को उस समय हुआ था जब स्वतंत्र कुमार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। महिला इंटर्न ने आरोप लगाया कि एक दिन न्यायमूर्ति ने अपने चैंबर में उससे छेड़छाड़ की।