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अफगानिस्तान के सुरक्षा हालात की थाह लेंगी सुषमा

Thu, 11 Sep 2014 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत ने मजबूत, स्वतंत्र और समृद्ध अफगानिस्तान बनाने के सपने को साकार करने के लिए बुधवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
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दोनों देश रक्षा और सैन्य क्षेत्र में सहयोग के साथ युद्ध से जूझते इस मुल्क के पुनर्निर्माण के काम में कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। भारत की ओर से यह भरोसा विदेेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को यहां पहुंचने पर दिलाया।

सुषमा ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात कर राजनीतिक, सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मसलों पर चर्चा की। उन्होंने काबुल में चार करोड़ डॉलर की लागत से बनाए गए भारतीय दूतावास के नए भवन का उद्घाटन किया।
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उन्होंने कहा, "यह अफगानिस्तान के बदलाव के लिए नाजुक दशक है। भारत हमेशा से अफगानिस्तान का पहला सामरिक साझेदार रहा है। हम हमेशा ही अफगान लोगों के लिए एक मजबूत, स्वतंत्र, संगठित और समृद्ध अफगानिस्तान के सपने के साथ हैं। इसके लिए अफगानियों ने बहुत कुर्बानियां दी हैं।"

'अफगानिस्तान पर नीति में बदलाव नहीं'

2001 में तालिबान के पतन के बाद अफगानिस्तान पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव के जरिए सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया में है।
सुषमा स्वराज की यह अफगानिस्तान यात्रा इसलिए खास है क्योंकि इस साल के आखिर में नाटो सेनाओं के यहां से हटने के बाद तालिबान और अल कायदा से जुड़े अन्य तत्वों के फिर से सिर उठाने की आशंकाएं तेज हो गई हैं।

बतौर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यह पहली अफगानिस्तान यात्रा है। सुषमा स्वराज ने कहा, "अफगानिस्तान में भारत विभिन्न विकास परियोजनाओं को तेज करेगा।"

साल के आखिर में नाटो फौजों की वापसी के मद्देनजर अफगानिस्तान अपने रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए भारत पर सैन्य उपकरणों और हथियार प्रणाली की आपूर्ति करने पर जोर डाल रहा है।

करजई पहले ही भारत को उन चीजों की सूची सौंप चुके हैं, जिनकी वह जरूरत महसूस करते हैं। पिछले साल नई दिल्ली की यात्रा के दौरान करजई ने अफगानिस्तान को सैन्य मदद बढ़ाने की मांग पर भारत के जवाब को संतोषजनक पाया था।

अफगानिस्तान को हरसंभव मदद का भरोसा

सुषमा से पूछा गया कि क्या एनडीए सरकार अफगानिस्तान पर नीति की समीक्षा करेगी?

उन्होंने कहा, "इस नीति में किसी तरह के बदलाव का कोई सवाल ही नहीं है। मैं जोर देकर कहना चाहूंगी कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत मदद जारी रखेगा। अफगानिस्तान को मदद और उसके पुनर्निर्माण में भारत दो अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। भारत सैकड़ों अफगान अधिकारियों को प्रशिक्षित भी कर चुका है।"

उन्होंने भारत और अफगानिस्तान दोनों को ही कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने की जरूरत बताई। भारत हथियारों और सैन्य उपकरणों की अफगानिस्तान को आपूर्ति को लेकर जरूर ऐहतियात बरत रहा है।
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दोनों देश बढ़ाएंगे रक्षा सहयोग

पड़ोसी देशों को साधने के मिशन के तहत बांग्लादेश, नेपाल के बाद अफगानिस्तान पहुंचीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज वहां से नाटो के सेना के हटने के बाद की स्थिति की समीक्षा करेंगी।

चूंकि अफगानिस्तान में 13 वर्षों के बाद लोकतांत्रिक ढंग से सत्ता का हस्तांतरण होना है, इसलिए विदेश मंत्री वर्तमान राष्ट्रपति हामिद करजई की विदाई के बाद की राजनीतिक स्थिति की थाह लेंगी।

हालांकि सुषमा के इस दौरे का मुख्य एजेंडा अफगानिस्तान की सुरक्षा की समीक्षा है। भारत को अरसे से नाटो सेना की अफगानिस्तान से विदाई के बाद अफगानिस्तान में अल कायदा, तालिबान सहित कई अन्य भारत विरोधी आतंकी संगठनों के नए सिरे से सिर उठाने की आशंका है।

यही कारण है कि भारत बार-बार अमेरिका सहित अन्य देशों को अफगानिस्तान पर अपनी चिंताओं से लगातार अवगत कराता रहा है।
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