निठारी कांड में फांसी की सजा पाने वाले सुरेंद्र कोली ने मेरठ जेल से देश के राष्ट्रपति, गृहमंत्री के अलावा अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, अमेरिकी न्यूज चैनल वाइस ऑफ अमेरिका, बीबीसी आदि संस्थानों को पत्र लिखकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।
14 मार्च 2014 को देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नाम संबोधित पत्र में कोहली ने कहा है कि निठारी कांड के मुख्य दोषी मोनिंदर पंधेर को जांच में बचा लिया गया।
सुरेंद्र कोली ने यह पत्र मेरठ जेल में मुलाकात के दौरान सल्ट के जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत को सौंपे। नारायण रावत के मुताबिक सुरेंद्र कोली ने इन पत्रों को जेल अधीक्षक के मार्फत संबंधितों को प्रेषित किए हैं।
सुरेंद्र कोली ने बराक ओबामा को चार पेज का पत्र लिखकर न्याय दिलाने की मांग की है। उसने आरोप लगाया है कि पुलिस ने निठारी कांड की जांच में गड़बड़ी की। यदि अन्य देशों की एजेंसी जांच करें तो वास्तविकता सामने आ जाएगी।
कोली ने लिखा है कि देश में इस किस्म के घृणित कामों में कई गिरोह शामिल हैं जो बच्चों, महिलाओं की तस्करी के साथ ही मानव अंगों की तस्करी में लिप्त हैं। उसने स्वयं को निर्दोष बताकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। कोली का आरोप है कि निठारी कांड के मुख्य दोषी मोनिंदर पंधेर को जांच में बचा लिया गया जबकि उसे निर्दोष होने के बाद भी दोषी साबित कर दिया गया है।
उसने पत्र में पंधेर के कई महिलाओं के साथ अवैध रिश्ते और उसके रंगीन मिजाजी का भी जिक्र किया है। इससे पहले 20 जून को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नाम पत्र लिखकर कोहली ने निठारी कांड की दोबारा जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी।
गुमसुम कोली को याद आई गीता और गांधी
सुप्रीम कोर्ट से रिव्यू पिटीशन खारिज होने के साथ ही सुरेंद्र कोली के चेहरे पर मौत का खौफ एक बार फिर साफ देखने को मिल रहा है। बुधवार को निठारी कांड के ही एक अन्य मामले में कोली को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया।
न्यायाधीश के ट्रेनिंग पर जाने के चलते इस मामले में सुनवाई अब तीन नवंबर तक टल गई है। करीब 15 मिनट तक कोली सीबीआई कोर्ट में रहा। इस दौरान वह पूरी तरह से गुमसुम रहा। कोर्ट परिसर में भी वह चुप्पी ही साधे रहा।
दूसरी ओर जेल सूत्रों की माने तो कोली ने खाना-पीना भी कम कर दिया है। बुधवार रात को भी वह अपनी हाई सिक्योरिटी बैरक में गीता और महात्मा गांधी की आत्मकथा पढ़ता रहा।
मालूम हो कि विगत 16 अक्तूबर को ही कोली ने जेल अधीक्षक को एक पत्र के माध्यम से फांसी के बाद न केवल अपने अंगदान की इच्छा जताई थी बल्कि भगवत गीता और महात्मा गांधी की आत्मकथा पढ़ने के लिए मांगी थी।
इस बीच सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी और पत्नी शांति देवी ने बुधवार को आरोप लगाया कि हमारी गरीबी ही सुरेंद्र के लिए अभिशाप बन गई है। हम पहले ही कह चुके हैं कि पुलिस ने पैसे वाले पंधेर को बचा लिया जबकि गरीब को न्याय की जगह फांसी मिल गई।
चार से पांच दिन में होगी फांसी
निठारी के नर पिशाच सुरेंद्र कोली के गले में बक्सर जेल का फंदा कसा जाएगा, जो वाया नैनी जेल मेरठ जेल पहुंच चुका है। बुधवार को वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने फांसीघर का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि कोली को फांसी देने में अभी पांच से सात दिनों का समय लग सकता है। आदेश भले ही किसी भी समय मिले लेकिन हम और फांसीघर पूरी तरह से तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कोली की फांसी की सजा माफ करने संबंधी पुनर्विचार याचिका मंगलवार को खारिज कर दी थी। इसके बाद से एक बार फिर इसकी प्रबल संभावना बन गई है कि कोली को जल्द ही डासना से मेरठ जेल शिफ्ट करते हुए फांसी दे दी जाएगी।
हालांकि वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसएचएम रिजवी का कहना है कि वैसे तो हम पूरी तरह तैयार हैं लेकिन संभावना है कि कोली को फांसी देने की प्रक्रिया में अभी करीब एक सप्ताह लगेगा। जेल अधीक्षक के अनुसार कोली को फांसी देने की सीबीआई कोर्ट द्वारा अभी नई तारीख मुकर्रर होनी है। इस विस्तृत आदेश पत्र में ही स्पष्ट होगा कि कोली को फांसी कब और किस समय देनी है।
इसके बाद उसे डासना से मेरठ जेल शिफ्ट किया जाएगा। स्थानीय जिलाधिकारी द्वारा मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की जाएगी। इस प्रक्रिया में पांच से सात दिन लग सकते हैं। कोली को रिकॉर्ड समय में फांसी देने की नौबत आती है तो हम इसके लिए भी तैयार हैं।
केवल चार लोग रहेंगे
वरिष्ठ जेल अधीक्षक के अनुसार कोली को यदि डासना जेल से यहां शिफ्ट किया जाता है तो उसे 10 बाई 12 की स्पेशल सेल में रखा जाएगा। उसे फांसी देने के दौरान डीएम द्वारा नियुक्त मजिस्ट्रेट, जेल का डॉक्टर, जल्लाद और वे खुद मौजूद रहेंगे।
कोली को फांसी से बचाने का प्रयास अभी जारी
सुप्रीम कोर्ट से भले ही निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली की रिव्यू पिटीशन खारिज हो गई हो, मगर अभी उसे फांसी के फंदे से बचाने के प्रयास जारी हैं।
बृहस्पतिवार को मामले में दिल्ली और गाजियाबाद के कुछ अधिवक्ता डासना जेल पहुंचकर सुरेंद्र कोली से वकालतनामे पर हस्ताक्षर करा सकते हैं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिव राइट्स नामक संस्था से जुडे़ गाजियाबाद में सुरेंद्र कोली के अधिवक्ता विक्रांत शर्मा ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी संस्था के लोग ही सुरेंद्र कोली को फांसी से बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
उन्होंने बताया कि निठारी केस की गहनता से पड़ताल के बाद संस्था से जुडे़ पदाधिकारियों का मानना है कि सुरेंद्र कोली गरीब है और उसे गलत फंसाया जा रहा है। इसी के चलते संस्था अब उसकी मदद करना चाहती है।
अधिवक्ता विक्रांत शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद संस्था के पदाधिकारी अभी कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं, हालांकि वह कोली को फांसी से बचाने के लिए निश्चित रूप से कुछ न कुछ अवश्य करेंगे।
उन्होंने बताया कि फिलहाल संस्था के पदाधिकारियों ने उन्हें कोली से दो वकालतनामे हस्ताक्षर कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। बृहस्पतिवार को वह डासना जेल जाकर सुरेंद्र कोली से मुलाकात करेंगे और वकालतनामे साइन कराएंगे।