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खत्म होंगे स्लीपर कोच, बैठकर करना होगा सफर?

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भारतीय रेलवे ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को काबू करने के लिए अब नए तरीकों पर काम कर रहा है। अगर यह योजना शुरू हुई तो लोगों को रात में बसों की तरह ट्रेनों में भी सफर करना पड़ेगा।
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नए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड को सुझाव दिया है कि व्यस्तम ट्रेनों में स्लीपर डिब्बों को चेयर कार में तब्दील कर दिया जाए। रेल मंत्री ने सुझाव दिया है कि रात में 10 घंटे के भीतर अपने अंतिम स्टेशन पर पहुंचने वाली ट्रेनों में स्लीपर डिब्बों को हटा दिया जाए।साथ ही रेलवे मंत्री ने कम दूरी वाले रूटों पर डबल डेकर ट्रेन चलाने पर जोर दिया है।

रेलवे बोर्ड ने इस प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। रेलवे के सभी जोनल कार्यलयों से इस बाबत यात्रियों के आंकड़े मांगे गए हैं। सुरेश प्रभु की तरफ से जारी एक नोट में इस बात का जिक्र है कि गर्मियों की छुट्टियों और त्यौहारों के समय ट्रेनों में काफी भीड़ हो जाती है। इस भीड़ को कम करने के लिए रात में 10 घंटे से कम दूरी में सफर तय करने वाली ट्रेनों में स्लीपर कोच की जगह चेयर कार लगाई जाएं।
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रेलवे के पास नहीं है ज्यादा टू सीटर कोच

इस नोट में कहा गया है कि यात्री ट्रेनों से रेलवे को कुल आउटपुट में सिर्फ 28.5 फीसदी का योगदान होता है जबकि इसमें ऊर्जा की खपत 44 फीसदी हो जाती है। अपनी ऊर्जा की खपत को घटाने के लिए हम छोटी दूरी की ट्रेनों में यह फार्मूला अपना सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक दिल्‍ली-जम्‍मू, दिल्‍ली-लखनऊ, दिल्‍ली-वाराणसी या दिल्‍ली-पटना के बीच गर्मियों और त्योहारों में ऐसी ट्रेन चलाकर भीड़ को कम करने में मदद ली जा सकती है।

रेलवे के अधिकारियों ने इस योजना को लागू करने में आने वाली खमियों को भी बताया है। सूत्रों के मुताबिक एक आर‌क्षित चेयर कार में 108 सीट होती हैं जबकि नॉन-एसी स्‍लीपर कोच में 80 सीट होती हैं। ऐसे में सिर्फ 28 लोगों को और जगह मिल पाएगी। वहीं टिकट की कीमतों को भी घटाना पड़ेगा।

रेलवे की तरफ से अभी दिल्‍ली से लखनऊ तक स्लीपर ट्रेन में सफर करने के लिए 285 रुपए देने पड़ते हैं। वहीं टू सीटर कोच में यात्रा करने के लिए 185 रुपए का भुगतान करना पड़ता है। अधिक लोगों को सफर करवाने के बावजूद हर कोच से सिर्फ 2000 रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो पाएगी।

रेलवे के सामने दूसरी समस्या यह भी है कि रेलवे के पास अभी सिर्फ 2,676 नॉन एसी टू सीटर कोच हैं। यह रेल कोच पहले ही ट्रेनों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे डिब्बों को ट्रेन में प्रयोग करने के लिए बड़ी संख्या में रेलवे को ऐसे टू सीटर कोच को बनवाना पड़ेगा।
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