टीवी चैनलों की सामग्री नियमित करने के मकसद से एक स्वतंत्र व्यवस्था स्थापित करने संबंधी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है।
चीफ जस्टिस पी सदाशिवम और जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने जनहित याचिका पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा कानून मंत्रालय से जवाब मांगा है।
इसके साथ ही चुनाव आयोग, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया को भी याचिका का जवाब देने के लिए कहा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चैनलों पर भ्रामक और अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली सामग्री का प्रसारण किया जा रहा है तथा इनकी निगरानी के लिए कोई नियामक निकाय नहीं है।
अदालत ने यह आदेश एक गैर सरकारी संगठन हिन्दू जागृति समिति की जनहित याचिका पर दिया जिसमें इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है। याचिका में यह भी कहा है कि कोर्ट को यह भी घोषित करना चाहिए कि इस संबंध में सरकार का 2008 का आदेश लागू नहीं होगा। यह आदेश केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट का उल्लंघन करने वाले चैनलों के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू करने में अड़चन न बने।