शिक्षा विभाग की गैर जिम्मेदराना रवैये के कारण जिला स्तर पर चयनित होने के बावजूद कई विद्यार्थियों को स्कूल स्टेट गेम्स में खेलने का मौका नहीं मिला। ये खिलाड़ी डीसी मॉडल स्कूल के हैं।
फिजिकल एजुकेशन की शिक्षिकाओं का आरोप है कि शिक्षा विभाग की ओर स्कूल स्टेट गेम्स के लिए उनके स्कूल को सूचित ही नहीं किया गया।
अन्य जगहों से सूचना मिलने के बाद वह अपने स्कूल के विद्यार्थियों को लेकर स्कूल स्टेट गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी में शामिल होने के लिए 25 नवंबर को पंचकूला सेक्टर तीन के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में पहुंचीं, लेकिन उन्हें किट नहीं दी गई। बाद में कोच ने कहा, इन बच्चों को रैकेट तक पकड़ने नहीं आता। इसलिए दूसरे बच्चों को मौका दिया।
वहीं, डीसी मॉडल स्कूल की अंडर 14 आयु वर्ग की गर्ल्स खिलाड़ियों को सुबह साढ़े ग्यारह से शाम छह बजे तक जिमखाना क्लब में चल रहे लॉन टेनिस टूर्नामेंट के लिए बिठाकर रखा गया।
बारी आने के बारे में कोच पूछते तो जवाब मिलता था कि एनाउंस किया जाएगा। काफी देर बाद शिक्षिका सोनिया घई ने लॉन टेनिस टीम के को-आर्डिनेटर कमल कुमार से प्रतियोगिता के बारे में पूछा तो 26 नवंबर को आने के लिए कहा गया।
जब अगले दिन डीसी मॉडल स्कूल की फिजिकल एजुकेशन की दूसरी शिक्षिका कुलवीर रंधावा छात्राओं को लेकर जिमखाना क्लब पहुंची तो उसी इंस्ट्रक्टर ने कहा कि ‘आपकी छात्राओं को रैकेट तक पकड़ना नहीं आता, इसलिए दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों को मौका दिया गया है’।
डीसी मॉडल के बच्चों के साथ ही ऐसा बर्ताव क्यों
1. लॉन टेनिस में डीसी मॉडल स्कूल की छात्राओं का अंडर-14 आयु वर्ग में पहला स्थान था। स्टेट गेम्स के लिए जिलेभर के स्कूलों से पांच खिलाड़ियों का चयन किया गया था, जिनमें पहले नंबर पर डीसी मॉडल स्कूल की दो छात्राएं थीं। फिर भी इन दोनों छात्राओं को स्टेट गेम्स में मौका नहीं मिला, जबकि तीसरे से पांचवें नंबर पर रहे बच्चों को खेलने का मौका दिया गया।
2. लड़कों के लिए रोहतक में 19-22 नवबंर को आयोजित स्कूल स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में डीसी मॉडल स्कूल के रूपिंदर सिंह को खेलने का मौका नहीं मिला।
रूपिंदर ने स्कूल जिला एथलेटिक मीट में अंडर 16 आयुवर्ग के 100 मीटर दौड़ में पहला स्थान हासिल किया था, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल स्टेट मीट की सूचना ही नहीं दी गई।
जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने के बाद भी सूचना नहीं मिलने के कारण स्टेट गेम्स में 100 मीटर दौड़ में हिस्सा नहीं ले पाया। इसके लिए तीन महीने से तीन-चार घंटे प्रैक्टिस कर रहा था।
- रूपिंदर सिंह, डीसी मॉडल स्कूल, पंचकूला
डिस्ट्रिक स्कूल गेम्स लॉन टेनिस के डबल्स में पहला स्थान हासिल करने के बाद भी मुझे सुबह से शाम तक बैठाया गया। बाद में कहा-आपको रॉकेट ही पकड़ने नहीं आता।
- साक्षी, डीसी मॉडल स्कूल, पंचकूला
मुझसे कहा गया कि आपके स्कूल में लॉन टेनिस की प्रैक्टिस सही तरीके से नहीं कराई जाती है। आप लोगों को तो रॉकेट तक पकड़ने नहीं आता। अपने माता-पिता से कहो कि हमारे पास प्रैक्टिस के लिए भेजें।
- कोमल, डीसी मॉडल स्कूल पंचकूला
25 नवंबर को सुबह साढे़ ग्यारह बजे से शाम छह बजे तक बैठी रही। जब शाम ढलने लगी तो लॉन टेनिस के इंस्ट्रक्टर कमल कुमार ने बताया कि अलगे दिन आइएगा।
- सोनिया घई, शिक्षिका, डीसी मॉडल स्कूल, पंचकूला
26 नवंबर को दोबारा बच्चों को लेकर पहुंची। कमल कुमार से जवाब मिला कि आपके विद्यार्थियों को रॉकेट पकड़ना तक नहीं आता। इनसे अच्छे बच्चे दूसरे स्कूल के थे, इसलिए उन्हें मौका दिया गया।
- कुलवीर रंधावा, शिक्षिका, फिजिकल एजुकेशन, डीसी मॉडल स्कूल, पंचकूला
सूचना नहीं देने की बात गलत है। विभाग की तरफ से सभी स्कूलों को मेल से सूचित किया गया था। रहा लॉन टेनिस का सवाल तो शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी।
- जय भगवान पन्नू, एईओ, शिक्षा विभाग, पंचकूला
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