दया याचिकाओं के निपटारे में देरी के आधार पर मौत की सजा को उम्रकैद में
तब्दील करने के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम
कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी।
सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा था कि 21 जनवरी का अदालत का फैसला गैरकानूनी और त्रुटियों से भरा है। सर्वोच्च अदालत ने इस फैसले में 15 दोषियों के मृत्युदंड को उम्रकैद में तब्दील किया था।
चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली चैंबर पीठ ने सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका के आधार को नकारते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में दिए गए आधार सुनवाई योग्य नहीं हैं।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही जनवरी में दिए फैसले में मृत्युदंड के इंतजार में जेल में दिन गिन रहे 15 दोषियों को दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक और बेवजह की देरी के चलते जीवनदान दिया था।
सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा था कि इस तरह के महत्वपूर्ण विषय पर संविधान पीठ को सुनवाई करनी चाहिए थी और तीन न्यायाधीशों की पीठ ने बगैर अधिकार क्षेत्र के ही यह फैसला दिया है।
याचिका में कहा गया था कि यह फैसला कानून के विपरीत है। इस फैसले में कई खामियां हैं।
शीर्ष अदालत से जीवनदान पाने वाले 15 दोषियों में चंदन तस्कर वीरप्पन के सहयोगी गणप्रकाश, सिमोन, मीसेकर मदैया और बिलावांद्रा शामिल हैं।
अन्य कैदियों में सुरेश रामजी, गुरमीत सिंह, प्रवीण कुमार, सोनिया और उसके पति संजीव सुंदर सिंह और जाफर अली हैं। सुरेश, रामजी, गुरमीत सिंह और जाफर अली उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद हैं।
हरियाणा के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया की बेटी सोनिया और उसके पति संजीव हरियाणा की जेल में बंद हैं।