सुप्रीम कोर्ट ने बिजनौर के गैंगरेप मामले में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से आरोपियों की याचिका पर जल्द निर्णय लेकर निपटारा करने को कहा है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा रखी है।
इस मामले में सपा सरकार में मौजूदा मंत्री मनोज पारस समेत चार आरोपी हैं। सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश जारी करते हुए पीड़ित पक्ष की याचिका का निपटारा कर दिया है।
जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील संजीव भटनागर ने कहा कि बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के मामले में भी न्याय की गुहार लगाते छह साल हो गए। आरोपी ट्रायल में देरी करने के लिए लगातार हथकंडे अपना रहे हैं।
निचली अदालत ने तो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वांरट जारी किया और कुर्की का भी आदेश दिया। लेकिन हाईकोर्ट ने आरोपियों की याचिका पर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर ही रोक लगा दी।
इसलिए अदालत से गुजारिश है कि इस मामले में पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने के लिए उचित आदेश जारी करे।
क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश में कई खामियां है, उसने यह गौर नहीं किया कि अपराध किसके खिलाफ है और आरोप कितना गंभीर है। वकील के तर्क पर सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किया है।
फिलहाल हम हाईकोर्ट को आरोपियों की ओर से ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका का जल्द निपटारा करने का निर्देश दे रहे हैं।
पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट की ओर से निर्णय जारी करने के बाद असंतुष्ट होने पर शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
गौरतलब है कि 2006 में एक 34 वर्षीय महिला ने पारस व उसके तीन साथियों पर घर बुलाकर गैंगरेप करने का आरोप लगाया था।
महिला का कहना था कि सपा नेता ने पति के नाम पर राशन की दुकान आवंटित करने के संबंध में उसे बुलाया था।