दलितों के घर जाने को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हनीमून की विवादास्पद टिप्पणी करने वाले योग गुरु रामदेव के खिलाफ मामलों की कार्यवाही पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने जारी रखा है।
सर्वोच्च अदालत ने उनके खिलाफ 9 मई को देश के विभिन्न हिस्सों में दायर मामलों की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने हालांकि रामदेव की ओर से दायर याचिका में दिए गए दो प्रोफार्मा प्रतिवादियों के नाम हटा दिए हैं।
साथ ही कहा है कि संशोधित वादी-प्रतिवादी की सूची दो सप्ताह में पेश किए जाने के बाद इस मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। याद रहे कि अदालत ने रामदेव की याचिका पर कई राज्यों की पुलिस को नोटिस जारी किया, जहां रामदेव के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे।
रामदेव पर लगाए थे गंभीर आरोप
साथ ही रामदेव को पहले दस लाख रुपये अदालत में जमा करने का निर्देश दिया था, जो शिकायत दर्ज कराने वाले लोगों को यात्रा के लिए उपलब्ध कराया जाना था।
अदालत ने यह आदेश रामदेव की ओर से दायर उस याचिका पर जारी किया था, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने और उनकी विवादास्पद हनीमून टिप्पणी पर देश के तमाम हिस्सों में दायर एफआईआर को एक साथ करने का आग्रह किया गया था।
गौरतलब है कि रामदेव की ओर से राहुल गांधी और दलितों से जुड़ी हनीमून की टिप्पणी की तमाम पार्टियों और संगठनों ने तीखी आलोचना की थी। उन्होंने रामदेव की टिप्पणी को दलित विरोधी करार दिया था।
रामदेव के बयान का होगा विश्लेषण
योग गुरु के खिलाफ पहली प्राथमिकी लखनऊ के महानगर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 17(जी) के तहत दर्ज की गई थी।
पुलिस ने रामदेव के बयान के वीडियो फुटेज का विश्लेषण करने के बाद यह प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद कई अन्य राज्यों में रामदेव के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराई गई थीं।