मेरठ के सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट में मंगलवार को ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसे सुनकर लोग असमंजस में हैं। उन्हें तो ऐसी कहानी पर यकीन करना पड़ रहा है, जैसी दंत कथाओं में सुनने को मिलती हैं।
मेरठ में डेंगू ने दो दिन पहले (मंगलवार को) इकलौता चिराग बुझा दिया। आंखों से झर-झर बरसते वियोग के आंसुओं के बीच परिजन 11 साल के मानिक का अंतिम संस्कार करने मंगलवार शाम सूरजकुंड श्मशान घाट पहुंचे।
सारी तैयारियां चल ही रही थीं कि अचानक एक ‘बाबा’ वहां आया। बच्चे के शव को देखकर बोला- इसकी उम्र तो 52 साल है। यह बालक इस उम्र में नहीं मर सकता। 72 घंटे में मानिक खुद बोलेगा, इसे घर ले जाओ। फिर क्या था, परिजन इकलौते चिराग में सांस आने की उम्मीद में शव घर ले आए और पूजा-पाठ में लगे हैं।
तीन दिन से चल रहा है शव पर पूजा-पाठ
ब्रह्मपुरी क्षेत्र के शिव शक्ति नगर निवासी कपिल मित्तल के इकलौते बेटे मानिक (11 वर्ष) की मंगलवार सुबह डेंगू के चलते मौत हो गई थी। मंगलवार शाम 6 बजे परिजन मानिक के शव को लेकर सूरजकुंड स्थित बच्चा श्मशान घाट में पहुंचे।
तभी एक ‘बाबा’ पहुंचा और मानिक को देखकर बोला, यह अभी नहीं मर सकता। इसे घर ले जाओ, 72 घंटे 5 मिनट में यह बोलने लगेगा। उसकी बात भरोसे के काबिल नहीं थी, फिर भी परिजनों में यह आस जग गई कि क्या पता इकलौते चिराग की सांसें लौट आएं।
परिजन शव को घर ले आए और मानिक के जिंदा होने की उम्मीद में पूजा-पाठ में लगे हैं। तीन दिन से आसपास के लोगों का मानिक के घर पर तांता लगा हुआ है।
चमत्कार की उम्मीद में परिजन
सबकी जुबान से एक शब्द निकलता है कि भगवान कोई ऐसा चमत्कार कर दे, जिससे मानिक बोल उठे। परिवार के लोग मानिक के पास पूजा-पाठ कर रहे हैं। इसकी जानकारी पर बृहस्पतिवार को ब्रह्मपुरी पुलिस भी मौके पर पहुंची थी।
पुलिस आस्था में आस की उम्मीद जगाये बैठे मानिक के परिजनों को देखकर लौट गई। ‘बाबा’ के कहे अनुसार शुक्रवार शाम छह बजे 72 घंटे की अवधि पूरी हो जाएगी।
मेडिकल साइंस में तो नहीं हुआ ऐसा
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीरोत्तम तोमर के मुताबिक, मेडिकल साइंस में ऐसा कभी नहीं हुआ है। जांच के बाद मृत घोषित किया गया मरीज कभी जीवित नहीं हुआ है। इस केस में भी ऐसी कोई संभावना नहीं है कि बच्चा दोबारा जीवित हो उठे।