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चौंका देगी इस शख्स की सक्सेस स्टोरी!

Mon, 22 Sep 2014 03:24 PM IST
देवेंद्र कुमार/अमर उजाला, सहारनपुर
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खेती और बागवानी को घाटे का सौदा मानकर मायूस हो चुके किसानों के लिए सहारनपुर जिले के मरवा गांव के बागवान करुण कुमार गुरेजा प्रेरणास्रोत्र बन सकते हैं। उन्होंने 70 टन आम का निर्यात कर जहां विदेश में नवाब ब्रांड का डंका बजाया, वहीं विदेशी मुद्रा अर्जित कर लाभ भी कमाया है। उन्होंने अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान के कडे़ मानकों पर अपने आम को खरा भी साबित किया।
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यूरोपीय संघ की पाबंदी के बावजूद इस साल जिले से करीब 121 टन आम का निर्यात किया गया। इसमें से 70 टन आम का योगदान मरवा गांव के किसान से निर्यातक बने करुण कुमार गुरेजा का रहा। उन्होंने अपने बागों से दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम का कई देशों में निर्यात किया। मंडी समिति की ओर से जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने बागों में एक्सपोर्ट क्वालिटी के आम पैदा कर निर्यात करने की ठानी।

करुण ने पहले बाग की मिट्टी की जांच करवाई और रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों और माइक्रोन्यूटे्रंट का प्रयोग किया। आम को कीटों आदि से बचाने के लिए जापान और कोरिया से बैग मंगाए। ये बैग आमों पर लगाए। इससे आम कीट-फंगस से बचा रहा और उसकी गुणवत्ता बनी रही। करुण ने बताया कि इस साल उन्होंने 70 टन आम आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और जापान एक्सपोर्ट किया है। अगले सीजन में आम निर्यात की और संभावनाएं तलाशने के लिए वे 15 अगस्त को एक पखवाड़े के लिए जापान गए थे। वहां उन्होंने आम तोड़ने के लिए हाईड्रोलिक मशीन और एक स्प्रे मशीन का आर्डर दिया है। दोनों मशीनें जल्दी यहां पहुंचेंगी।
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निर्यात में लागत और मुनाफे की स्थिति

बागवान करुण कुमार के अनुसार आम को विदेश भेजने में उनको करीब 200 रुपये प्रति किलो का खर्च आया। इसमें 35 से 40 रुपये किलो आम, करीब 100 रुपये भाड़ा, 20 रुपये पैंकिग और 22 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क शामिल हैं। आम आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 360, अमेरिका में 400 से 450 और जापान में 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिका। उन्हें मंडी परिषद की ओर से 26 रुपये किलो के हिसाब से अनुदान भी प्राप्त हुआ। इसमें 13 रुपये ब्रांड प्रमोशन और 13 रुपये किराया अनुदान है।

ऐसे होती है एक्सपोर्ट वाले आम की प्रोसेस
निर्यात के लिए आम को डंडी सहित तुड़ाई होती है। इसके बाद मंडी समिति के मैंगो पैक हाउस में उसे प्रोसेस किया जाता है। पहले चेप निकालने के लिए करीब दो घंटे तक आम को उल्टा रखते हैं। इसके बाद  मशीन के माध्यम से उसकी वाशिंग कर ग्रेडिंग होती है। फिर उसे वैपर हीट ट्रीटमेंट (वीएचटी)से  गुजारते हैं। अमेरिका के लिए आम का रेडिएशन भी होता है। इस प्रोसेस केसमय भारतीय और संबंधित देश के विशेषज्ञ मौजूद रहते हैं।

अन्य बागवान भी आगे आएं: सचिव
मंडी सचिव ब्रजपाल सिंह ने बताया कि विदेश में भारतीय आम के निर्यात की काफी संभावनाएं हैं। इसके लिए किसानों को निर्यात योग्य आम को पैदा करना होगा। इसके लिए किसानों को शुरू से ही बाग की विशेष देखभाल करनी होगी। इससे उसे आम का अच्छा रेट मिल सकेगा। बागवानों के लिए जिले के किसान करुण कुमार गुरेजा प्रेरणास्रोत्र बन सकते हैं।
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