खेती और बागवानी को घाटे का सौदा मानकर मायूस हो चुके किसानों के लिए सहारनपुर जिले के मरवा गांव के बागवान करुण कुमार गुरेजा प्रेरणास्रोत्र बन सकते हैं। उन्होंने 70 टन आम का निर्यात कर जहां विदेश में नवाब ब्रांड का डंका बजाया, वहीं विदेशी मुद्रा अर्जित कर लाभ भी कमाया है। उन्होंने अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान के कडे़ मानकों पर अपने आम को खरा भी साबित किया।
यूरोपीय संघ की पाबंदी के बावजूद इस साल जिले से करीब 121 टन आम का निर्यात किया गया। इसमें से 70 टन आम का योगदान मरवा गांव के किसान से निर्यातक बने करुण कुमार गुरेजा का रहा। उन्होंने अपने बागों से दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम का कई देशों में निर्यात किया। मंडी समिति की ओर से जयपुर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मार्केटिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने बागों में एक्सपोर्ट क्वालिटी के आम पैदा कर निर्यात करने की ठानी।
करुण ने पहले बाग की मिट्टी की जांच करवाई और रिपोर्ट के आधार पर उर्वरकों और माइक्रोन्यूटे्रंट का प्रयोग किया। आम को कीटों आदि से बचाने के लिए जापान और कोरिया से बैग मंगाए। ये बैग आमों पर लगाए। इससे आम कीट-फंगस से बचा रहा और उसकी गुणवत्ता बनी रही। करुण ने बताया कि इस साल उन्होंने 70 टन आम आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और जापान एक्सपोर्ट किया है। अगले सीजन में आम निर्यात की और संभावनाएं तलाशने के लिए वे 15 अगस्त को एक पखवाड़े के लिए जापान गए थे। वहां उन्होंने आम तोड़ने के लिए हाईड्रोलिक मशीन और एक स्प्रे मशीन का आर्डर दिया है। दोनों मशीनें जल्दी यहां पहुंचेंगी।