करीब दो महीने पहले भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में पार्टी के नए अध्यक्ष अमित शाह ने जिम्मेदारी संभाली है।
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फोन पर फोन बज रहे हैं। वहां बैठे एक जानकार ने आंखों देखा हाल बयान करते हुए कहा कि अधिकतर फोन महाराष्ट्र से आ रहे थे और फोन करने वालों में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता भी शामिल थे।
उस जानकार ने बताया कि वो सभी लोग भाजपा में शामिल होने का अनुरोध कर रहे थे। भाजपा का दिल्ली मुख्यालय इन दिनों राजनीतिक गतिविधियों से सरगर्म है।
राजनाथ सिंह, लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और ऐसे सभी पुराने चेहरे यहां नजर नहीं आते जो कुछ महीने पहले तक कई सालों से नज़र आते थे।
पार्टी के नए दौर की कमान है 51 वर्षीय अमित शाह के पास। अगर प्रधानमंत्री देश के सब से महत्वपूर्ण नेता हैं तो अमित शाह शायद दूसरे नंबर पर हैं।
ऐतिहासिक जीत से आगे
अजय उमट गुजरात के एक जाने माने पत्रकार हैं और अमित शाह को काफी करीब से जानते हैं।
वो अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने को कुछ इस तरह से देखते हैं, "मोदी जी ने अमित शाह को पार्टी अध्यक्ष इसलिए रखा है ताकि पार्टी पर उनका पूरी तरह से क़ब्ज़ा रहे, जैसे सरकार पर उनका सम्पूर्ण नियंत्रण हो गया है।"
पार्टी दफ्तर में बैठे मेरे जानकार ने कहा कि उसके सामने अमित शाह के पास एक लिस्ट आई, जिसमें उनके चार राज्यों के दौरे का पूरा कार्यक्रम था। वो उन चार राज्यों, यानी केरल, जम्मू, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का दौरा करके अभी अभी लौटे हैं।
उत्तर प्रदेश में पार्टी को ऐतिहासिक जीत का श्रेय केवल अमित शाह को दिया जाता है। लेकिन वो अब भी संतुष्ट नहीं हैं। इन दिनों वो चुनाव प्रचार मोड में हैं।
'कमांडिंग अथॉरिटी' की कमान
महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर और झारखण्ड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और अमित शाह का मिशन है कि उनके बॉस मोदी की रणनीति को कामयाब बनाना।
और वो रणनीति है कांग्रेस का सभी बचे खुचे राज्यों से सफाया करना। अगर इस राह में कोई गैर कांग्रेसी सरकार आए तो उसे भी चुनाव में उखाड़ फेंकना।
गुजरात के मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले अमित शाह का उदय तेजी से हुआ है और आज वो अपनी पार्टी के बेताज बादशाह हैं। प्रधानमंत्री इक्का-दुक्का लोगों पर ही पूरा भरोसा करते हैं। इन लोगों में अमित शाह का नाम सबसे ऊपर है।
अहमदाबाद के अनवर शेख दोनों को काफी वर्षों से जानते हैं। वो कहते हैं, "कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि मोदी कमांडिंग अथॉरिटी हैं और शाह इम्प्लीमेंटिंग अथॉरिटी।"
'जोडी नंबर वन'
गुजरात में कांग्रेस पार्टी के शक्ति सिंह गोहिल नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में विपक्ष के नेता होते थे।
वो मोदी और अमित शाह दोनों को वर्षों से जानते हैं, "दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक दूजे के लिए हैं। मोदी जी को शाह से अच्छा बुद्धिमान और चतुर सहयोगी नहीं मिल सकता और शाह को मोदी से बड़ी ढाल नहीं मिल सकती।"
अमित शाह और नरेंद्र मोदी की ये ' जोड़ी नंबर वन' 25 साल पुरानी है। उस समय दोनों आरएसएस के प्रचारक थे और भाजपा के उभरते सितारे। मोदी ने अमित शाह के गुणों को पहचाना और उन्हें साथ ले लिया।
अजय उमट कहते हैं, "ये सप्लीमेंट्री कंम्प्लिमेंट्री रिश्ता है। मोदी जी को अमित शाह की शक्ल में अपना हनुमान मिल गया है। मोदी क्या चाहते हैं वो अमित शाह से अच्छा कोई नहीं समझता।"
शाह का विवादास्पद व्यक्तित्व
अमित शाह का उदय नरेंद्र मोदी के उदय से जुड़ा है और कांग्रेसी नेता शक्ति सिंह गोहिल के शब्दों में 'कल को अगर एक टूटा तो दोनों गिरेंगे।'
अमित शाह अपने बॉस से भी अधिक विवादास्पद व्यक्ति हैं। उनके खिलाफ गुजरात फर्ज़ी पुलिस मुड़भेड़ में मारे गए सोहराबुद्दीन और प्रजापति मुक़दमे में हत्या का आरोप है।
वो 2010 में तीन महीने जेल में गुज़ारने के बाद से जमानत पर रिहा हैं। अदालत ने उन्हें दो साल के लिए गुजरात से बाहर रखने का भी आदेश दिया था जिसका पालन उन्हें करना पड़ा।
सोहराबुद्दीन हत्याकांड का मुक़दमा सुप्रीम कोर्ट के कहने पर गुजरात के बजाय मुंबई में चल रहा है जहां नौ सितम्बर को इस केस की अगली तारीख है।
सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन कहते हैं, "शाह हत्या के अभियुक्त हैं उसके बावजूद उन्हें पूरी पार्टी सौंप दी गई है। ये उन्हें बचाने के लिए किया गया है।"
पिछले डेढ़ साल में अमित शाह अब तक अदालत में केवल एक बार हाज़िर हुए हैं। उनपर अदालत में हाजिर होने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
सीबीआई ने उनके खिलाफ अदालत को जो सुबूत दिए हैं उससे जांच एजेंसी को उनके खिलाफ केस मज़बूत नजर आता है।
लेकिन इन क़ानूनी कार्रवाइयों के बावजूद अमित शाह आज देश में प्रधानमंत्री के बाद दूसरे सब से अहम व्यक्ति बन चुके हैं और इन दिनों चार राज्यों में भाजपा की जीत को यक़ीनी बनाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी से आम चुनाव के 'मैंन ऑफ़ द मैच' का ख़िताब हासिल करने के बाद अब अमित शाह 'मैंन ऑफ़ द सीरीज़' बन कर ही दम लेंगे।