बिहार में लोजपा और तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों से गठबंधन करने में सफल रही भाजपा को आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ सीटों के बंटवारे से ज्यादा सीटों के चयन को लेकर परेशानियों से जूझना पड़ा रहा है।
ऐसा राज्य की जटिल राजनीतिक स्थिति के कारण हुआ है। दरअसल, औपचारिक बंटवारे का इंतजार कर रहे आंध्र प्रदेश के सीमांध्र में टीडीपी तो तेलंगाना में भाजपा की स्थिति बेहतर है।
दोनों इलाकों की जनता की सोच अलग है। भाजपा का मानना है कि दोनों क्षेत्रों में उसके पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का जादू चलेगा, लेकिन टीडीपी उसके इस तर्क से सहमत नहीं है।
सीटों के चयन को लेकर फंसा मामला
यह गतिरोध केवल सीटों की संख्या को लेकर नहीं है, बल्कि पसंदीदा सीटों को लेकर है।
यह तय है सीमांध्र में भाजपा टीडीपी की जूनियर पार्टनर होगी लेकिन विशाखापट्टनम, विजयवाड़ा, काकीनाड़ा, नारसापुर, तिरुपति और राजमुंद्री, चेवेल्ला, महबूबनगर और मलकाजगिरी सीट को लेकर गतिरोध बना हुआ है।
तेलंगाना में कांग्रेस और टीआरएस फिर करीब!
इन सीटों पर अपने-अपने दावे को कोई दल छोड़ना नहीं चाहता। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता डी पुरनदेश्वरीविशाखापट्टनम या फिर विजयवाड़ा से लड़ना चाहती हैं।
दूसरी ओर तेलंगाना में कांग्रेस और टीआरएस फिर करीब आ रही है। तेलंगाना में त्रिशंकु विधानसभा के अनुमान के बीच उन्हें भाजपा और टीडीपी के एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने की संभावना सता रही है।