इस लोकसभा चुनाव में बनारस से बड़ी सीट कोई नहीं। भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने वहां से लड़ने का ऐलान किया और जंग तेज हो गई। उनके बाद आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने चुनौती देने की घोषणा की।
जब लग रहा था कि मामला इन दोनों के बीच रहेगा, तो दबंग नेता मुख्तार अंसारी ने भी बता दिया कि वो बनारस से ही मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस ने अभी उम्मीदवार तय नहीं किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि वो मजबूत दावेदार उतारेगी।
इस बीच मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी ने यहां से कैलाश चौरसिया को उतारा है, जो मोदी को चुनौती देने के लिए एक नायाब नुस्खे पर काम कर रहे हैं।
बनारस की गली में चायवाला बनाम पानवाला
नरेंद्र मोदी के सामने खड़े समाजवादी पार्टी के बनारस से उम्मीदवार कैलाश चौरसिया, उनके 'चायवाला' बैकग्राउंड को टक्कर देने के लिए अपने 'पानवाले' पारिवारिक इतिहास को सामने रख रहे हैं।
मोदी मतदाताओं को रिझाने के लिए बार-बार इस बात का जिक्र कर रहे हैं कि वो बचपन में टी स्टॉल पर काम किया करते थे। दरअसल, ऐसा कर वो यह दिखाना चाहते हैं कि ऐसे तबके और मुश्किलों से गुजरने वाला शख्स पीएम पद तक पहुंचने का ख्वाब देख रहा है।
गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के दूसरे उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने के लिए चाय पे चर्चा का आयोजन भी किया जा रहा है। कुल मिलाकर भगवा दल इस बात को भुनाने का कोई मौका नहीं चूक रहा।
'खई के पान बनारस वाला' से प्रचार
लेकिन इन तमाम चीजों से बेपरवाह कैलाश चौरसिया का कहना है कि वो पान बेचने वालों के खानदान से ताल्लुक रखते हैं और यही बात उन्हें जीत तक पहुंचाएगी।
सपा समर्थक इन दिनों बनारस में चौरसिया के लिए समर्थन बटोरने के लिए 'खई के पान बनारस वाला' वाला गाना बजाकर समर्थन मांग रहे हैं। सपा उम्मीदवार के मुताबिक वो मतदाताओं से सीधे तौर पर बातचीत करना चाहते हैं। और घर-घर जाकर वो सभी पानवालों को एकजुट करेंगे।
उन्होंने कहा, "मैं मोदी की तरह हवा-हवाई बातें नहीं करता, जो चाय पे चर्चा का आयोजन कर प्रचार पर खूब पैसे खर्च कर रहे हैं। मुझे इसकी जरूरत नहीं है।"
चौरसिया ने मोदी को लपेटा
बनारस में चौरसिया समुदाय की काफी आबादी है। ये लोग बरसों से पान के कारोबार में हैं। मोदी चाय पे चर्चा के अभियान के तहत जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मतदाताओं तक पहुंचते हैं, वहीं सपा दावेदार आमने-सामने बातचीत में यकीन रखते हैं।
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री चौरसिया का दावा है कि उन्होंने कई साल पान बेचा है। देखना दिलचस्प होगा कि बनारस में चायवाले की चलती है या पानवाले की।
चौरसिया के मुताबिक उनके बुजुर्ग बनारस जिले में पान बेचा करते थे और उनके परिवार के सदस्य अब भी इसी कारोबार में शामिल है। उन्हें उम्मीद है कि चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है।
'मैं दूसरों की तरह पैसे जाया नहीं करता'
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने कहा, "मैं इस तरह के बेकार कार्यक्रमों में पैसा जाया नहीं करना चाहता। न ही टेलीविजन और अखबारों के जरिए अपना प्रचार करना चाहता हूं।"
उन्होंने कहा, "इसके बजाय मैं उस पैसे का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की मदद में करना चाहता हूं। जैसे बीमारों की मदद करना या फिर बेटियों की शादी करने जा रहे लोगों को सहायता देना।"
एक सपा कार्यकर्ता किशन दीक्षित ने कहा, "हम मतदाताओं को बता रहे हैं कि अपने बंद दिमागों को खोलें और याद रखें कि चौरसिया हमेशा यहीं रखेंगे, क्योंकि वो यही के हैं और गंगा के किनारे पर रहते हैं...लोकसभा चुनाव खत्म होते ही दूसरे गायब हो जाएंगे।"