फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खाद्य सुरक्षा योजना चार राज्यों में लागू

Tue, 20 Aug 2013 09:08 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
यूपीए की महत्वाकांक्षी खाद्य सुरक्षा योजना मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर चार राज्यों दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में लागू हो गई।
विज्ञापन


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली सरकार की योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि राजीव का सपना था कि देश में कोई भूखा न रहे। खाद्य सुरक्षा योजना उसी दिशा में एक कदम है।

योजना से 66.3 फीसदी ग्रामीण और 51.5 प्रतिशत शहरी आबादी को लाभ पहुंचेगा।

इसके तहत बीपीएल परिवारों को तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपया प्रति किलोग्राम मोटा अनाज मिलेगा।

खाद्य सुरक्षा विधेयक के फायदे:-
-इस योजना के तहत देश की करीब दो तिहाई आबादी को फायदा मिलने की उम्मीद है। गांवों की 75 फीसदी और शहरों में करीब 50 फीसदी आबादी तक ये योजना पहुंचेगी।

-योजना के मुताबिक गरीबों को 2 रुपये किलो गेहूं, 3 रुपये किलो चावल और 1 रुपये किलो मोटा अनाज राशन दुकानों के जरिए दिया जाएगा। एक परिवार को हर महीने 25 किलो अनाज मिलेगा।
विज्ञापन


-अन्त्योदय योजना (एएवाई) में कोई बदलाव नहीं कर के इसके लाभार्थियों को 35 किलो अनाज मिलेगा।

-इस स्कीम को आधार स्कीम के साथ लिंक्ड किया जाएगा। इसके तहत हर नागरिक को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा, जो कि डाटाबेस से लिंक्ड होगा। इसमें हर कार्डहोल्डर का बॉयोमीट्रिक्स डाटा होगा, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका बहुत कम हो जाएगी।

खाद्य सुरक्षा विधेयक की खामियां:-
-खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू होने के बाद लाभार्थियों के अनाज आवंटन में करीब 28 फीसदी की कटौती होगी। अभी बीपीएल परिवारों को हर महीने 35 किलो अनाज मिलता है। बिल में परिवार एक सदस्य को हर महीने पांच किलो अनाज देने का प्रावधान है, इस तरह पांच सदस्यों के परिवार को केवल 25 किलो ही अनाज मिल पाएगा।

-बीपीएल परिवार को 145 रुपये के बजाय कम से कम 185 रुपये में 35 किलो गेहूं मिल पाएगा। अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) परिवार को वर्तमान में 35 किलो गेहूं 70 रुपये में मिल रहा है, नए प्रारूप में उसे 185 रुपये में 35 किलो गेहूं मिलेगा।

-लाभ ले रहे लाभार्थियों की संख्या में भी कटौती हो जाएगी। देश की 90 फीसदी (करीब 100 करोड़) जनता को सरकार वर्तमान पीडीएस के माध्यम से अनाज का आवंटन कर रही है, जबकि नए खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के माध्यम से वह 67 फीसदी (लगभग 80 करोड़ जनता) को ही इसका लाभ देना चाहती है।

-सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ करीब 20,000 करोड़ रुपये होगा। इसके लिए करीब 6.123 करोड़ टन खाद्यान्न की जरूरत होगी। फूड सब्सिडी बिल पर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा।

-इस बिल में किसानों के संरक्षण का कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि एक, दो और तीन रुपये प्रति किलो की दर से जब अनाज का आवंटन होगा, तो किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिलेगा।

-खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने पर अनाज की कालाबाजारी भी बढ़ने की आशंका है। योजना का सस्ते दाम वाला अनाज चोरी-छिपे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाएगा।

-केंद्र सरकार वर्तमान सार्वजनिक प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से ही खाद्य सुरक्षा को लागू करना चाहती है, जिससे पीडीएस पर बोझ बढ़ेगा। इसके बावजूद विधेयक में खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और परिवहन को दुरुस्त करने का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें