भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और उनके करीबी सहयोगी अमित शाह को लपेटने के लिए यूपीए सरकार गुजरात में एक महिला की गैरकानूनी जासूसी के आरोपों की जांच करने के लिए न्यायिक आयोग बनाने की योजना में दोबारा जान फूंक सकती है।
बीच में खबर आई थी कि कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला किया है, क्योंकि उसे डर है कि मोदी पर निजी हमले करने पर भाजपा गांधी परिवार पर व्यक्तिगत अटैक कर सकती है।
लेकिन अब साफ हो गया है कि निजी हमलों से परहेज नहीं बरता जाएगा। रॉबर्ट वाड्रा को निशाना बनाकर मोदी और भाजपा गांधी परिवार पर लक्ष्य साध रहे हैं, वहीं कांग्रेस विकास मॉडल, पत्नी और स्नूपगेट को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश कर रही है।
नतीजों से पहले नियुक्त होगा जज
केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को मोदी के गढ़ में जाकर उन्हें चुनौती दी। सिब्बल ने कहा कि यूपीए सरकार जल्द ही स्नूपगेट मामले की जांच के लिए जज की नियुक्ति करने जा रही है।
उन्होंने कहा, "अयोग की अगुवाई करने वाले जज की नियुक्ति नतीजों के दिन 16 मई से पहले हो जाएगी।" सरकार ने दिसंबर 2013 में ऐलान किया था कि एक जांच आयोग इस मामले की तफ्तीश करेगा।
यह मामला तत्कालीन मंत्री अमित शाह के इशारे पर गुजरात पुलिस के गैरकानूनी सर्विलांस करने से जुड़ा है। टेप में कथित तौर पर वो किसी साहेब के कहने पर ऐसा करते सुनाई दे रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह साहेब मोदी हैं।
शाह और मोदी ने साजिश बताया
हालांकि, पहले अमित शाह और अब खुद नरेंद्र मोदी इन आरोपों से इनकार करते हैं। शाह के मुताबिक गुजरात में पहले से जारी इस मामले की जांच में यह साफ हो जाएगा कि यह मामला सर्विलांस का था या सिक्योरिटी का।
दूसरी ओर, मोदी का कहना है कि यह महिलाओं के सम्मान का मामला है और इस पर न तो उन्हें और न राहुल गांधी को सियासत करनी चाहिए। कोबरापोस्ट और गुलेल जैसी दो वेबसाइट की ओर से जारी टेप में बताया गया कि यह सर्विलांस साहेब के इशारे पर हुई।
इसके अगले चार महीने तक सरकार सुप्रीम कोर्ट का कोई रिटायर्ड जस्टिस या हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नहीं खोज पाई, जिसे इस आयोग का जिम्मा सौंपा जा सके। सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि ऐसा करने से उन पर राजनीति से प्रेरित जांच की अगुवाई करने का आरोप लग सकता है।
भाजपा पर दबाव बढ़ाने की रणनीति
भाजपा ने तब आरोप लगाया था कि आयोग गठन का फैसला कर सरकार मोदी को फंसाना चाहती है। लेकिन सरकार का दावा है कि वो मोदी की अगुवाई वाली गुजरात सरकार को निशाने पर नहीं ले रही।
उसके मुताबिक यह जांच आयोग भाजपा नेता अरुण जेटली की कॉल डिटेल की गैरकानूनी खरीद और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कथित स्नूपिंग की भी पड़ताल करेगा।
दरअसल, 16 मई को चुनावी नतीजे आने हैं, जिनसे साफ हो जाएगा कि कुर्सी अभी कांग्रेस या उसके सहयोगियों के हाथ में रहेगी या पिछले दस साल से विपक्ष में बैठ रही भाजपा को। कांग्रेस का 16 मई से पहले जज तय करने का फैसला भाजपा और मोदी पर दबाव बढ़ाने वाला है।
चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी नहीं
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसके लिए चुनाव आयोग की मंजूरी लेने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पैनल के गठन का फैसला जब हुआ था, तब चुनावों का ऐलान तक नहीं किया गया था।
इस बीच केंद्र की जांच को धता बताने के लिए गुजरात सरकार ने दो सदस्यों वाला जांच आयोग पहले ही बना दिया है, जिसकी अगुवाई गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व जज कर रहे हैं।
चुनावी गर्मी के बीच गुजरात का यह मामला एक बार फिर बड़ा हो गया है। दरअसल, मोदी अब गांधी परिवार पर सीधे हमले कर रहे हैं और कांग्रेस भी कोई मौका नहीं चूकना चाहती। सोमवार को उसने एक तस्वीर जारी कर एक हवाला कारोबारी के ताल्लुक मोदी से होने का आरोप लगाया था।