फसलों पर मौसम की मार के चलते उत्तर प्रदेश में किसानों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को बुंदेलखंड में फसल की बर्बादी के चलते पांच और अलीगढ़ में एक किसान की मौत हो गई। मरने वालों में जालौन के तीन, बांदा और महोबा के एक-एक किसान शामिल हैं। जालौन में एक किसान ने जहर खाकर जान दी है। अन्य किसानों की सदमे से मौत हुई है। इस तरह बर्बाद फसलों के चलते उत्तर प्रदेश में मरने वाले किसानों की संख्या अब 61 हो गई है।
जालौन में डकोर ब्लॉक के काबिलपुर गांव निवासी 48 साल के रामबिहारी ने दो एकड़ जमीन पर मटर बोई थी। पिछले दिनों बारिश और ओलावृष्टि से रामबिहारी की अधिकांश फसल का नुकसान हो गया था। शनिवार की शाम वह खेत से लौटा तो घर पर ही जहरीला पदार्थ खा कर जान दे दी। प्रधान ने बताया कि रामबिहारी पर बैंक और साहूकारों का करीब 15 लाख रुपये का कर्ज भी है। यहीं के चुर्खी थाना क्षेत्र के गांव खाखरी निवासी 50 साल के महावीर सिंह की 12 बीघा फसल बर्बाद हो गई है।
रविवार की सुबह वह अपने खेतों पर गया था और अचेत हो गया। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। जालौन में ही माधोगढ़ तहसील के कस्बा जगम्मनपुर के 55 वर्षीय भगवान शंकर चौरसिया के सात बीघा खेत में मसूर व मटर की फसल खराब हो गई। रविवार की सुबह खेत पर ही उनकी सदमे से मौत हो गई।
बांदा में दुखी किसान ने किया आत्मदाह
महोबा के ग्राम ननौरा निवासी अट्ठावन साल के रामकिशुन ने साधन सहकारी समिति लुहेड़ी से 40 हजार रुपये और साहूकारों से चार लाख रुपये कर्ज लिया था। अच्छी पैदावार होने से उसे कर्ज अदायगी की उम्मीद थी। शनिवार शाम परिजन उसे खेत में भोजन देकर वापस लौट आए। रात के समय परिजनों के खेत पर पहुंचने पर वह मृत अवस्था में पड़ा पाया गया। किसान के बेटे नृपत सिंह ने बताया कि कर्ज की वजह से पिता चिंतित थे। सदमे से उसकी मौत हो गई।
बांदा में अतर्रा के अनथुवा गांव में रहने वाले साठ साल के रामऔतार कुशवाहा ने दो वर्ष पूर्व बैंक की महोतरा शाखा से एक लाख 20 हजार रुपये कर्ज लिया था। उनकी पुत्री रजनी के बताया कि शनिवार रात खेत से लौटे तो उन्हें दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल ले जाते वक्त उनकी मौत हो गई। अलीगढ़ के छर्रा क्षेत्र में भी एक किसान की फसल खराब होने के सदमे से मौत हो गई।
बांदा में ही कर्ज लेकर बटाई के खेत पर बोई फसल ओले और बारिश में खत्म हो जाने से क्षुब्ध युवा किसान ने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। बचाने में बड़ा भाई भी बुरी तरह झुलस गया। दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आत्मदाह का प्रयास करने वाले किसान की हालत गंभीर है।
आपदा से अब तक 61 मौतें
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल के सदमे में यूपी में अब तक 61 मौतें हो चुकी हैं। इनमें जालौन के 12, उन्नाव के पांच, महोबा के पांच, हमीरपुर के चार, इटावा के चार, बांदा के तीन, फर्रुखाबाद के तीन, चित्रकूट के एक और कानपुर देहात के एक किसान शामिल हैं। इनके अलावा अलीगढ़ और हाथरस जिले में अब तक 23 किसानों की मौत हो चुकी है। इनमें अलीगढ़ के सात और हाथरस के 16 किसान शामिल हैं। अलीगढ़ में अतरौली, जट्टारी और हरदुआगंज क्षेत्रों में किसानों की मौतें हुई हैं। मालूम हो कि 20 मार्च को विधानसभा में सरकार ने किसानों की आत्महत्या करने की बात को नकार दिया। हालांकि 25 किसानों की मौत को स्वीकार किया।
सरकार ने माना एक हजार करोड़ का नुकसान
पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि जनवरी से मार्च के बीच इतना बड़ा नुकसान 10-15 साल में याद नहीं आता। आरंभिक तौर पर एक हजार करोड़ रुपये नुकसान हुआ है। इसकी जानकारी केंद्र को भेजी गई है और 500 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता मांगी है।
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि यूपी सरकार ने प्रारंभिक तौर पर बारिश और ओलावृष्टि से 26 जिलों में फसलों को 50 फीसदी से ज्यादा क्षति बताई है। राज्य सरकार से जैसे ही रिपोर्ट मिलेगी, केंद्रीय सहायता दे दी जाएगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों की मदद के लिए आपदा राहत कोष से जो 200 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है, उसमें 75 फीसदी हिस्सा केंद्र का है।