नरेंद्र मोदी सरकार ने उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को पिछले सप्ताह मिजोरम का राज्यपाल बना दिया था। मेघालय के राज्यपाल कृष्णकांत पॉल को उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई।
फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा होने लगी कि अजीज कुरैशी को मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की सजा दी गई है। अजीज कुरैशी का आरोप था कि केंद्र सरकार उन्हें राज्यपाल पद से हटाने की कोशिश कर रही है, नतीजतन उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हालांकि अजीज कुरैशी को मिजोरम का राज्यपाल बनाकर मोदी सरकार नए किस्म के विवाद को हवा दे दी। दरअसल राजग सरकार ने बीते छह महीने में पांच बार मिजोरम के राज्यपाल बदले हैं।
बार-बार राज्यपाल बदले जाने से वहां के नागरिकों को ऐसा लगने लगा है कि केंद्र सरकार राज्य की छवि खराब कर रही है। मिजोरम की छवि एक ऐसे राज्य के रूप में बनाई जा रही हैं, जहां राज्यपालों को सजा के तौर पर भेजा जाता है।
अजीज कुरैशी को 9 जनवरी को लेनी है शपथ
अजीज कुरैशी को 9 जनवरी को राज्यपाल के रूप में शपथ ले लेना है। हालांकि मिजोरम की राजनीतिक पार्टियों और सिविल सोसायटी के बीच शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तनिक भी उत्साह नहीं है।
मिजोरम के राजनीतिज्ञों और बुद्घिजीवियों का मानना है कि राज्यपाल को बार-बार बदल राज्य का अपमान किया जा रहा है।
मिजोरम की जोराम नेशनलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष लाल दुहावमा का कहना है कि छह महीने में पांच राज्यपाल बनाकर मिजोरम का अपमान किया जा रहा है।
दरअसल कुरैशी का तबादला नहीं किया गया है। केंद्र सरकार की इच्छा है कि वे पद छोड़ दें, लेकिन उन्हें हटाने की हिम्मत नहीं कर पाई। इसलिए उन्हें मिजोरम भेज दिया ताकि वह खुद पद छोड़ दें। उन्होंने कहा कि हम ऐसे तबादलों से कतई खुश नहीं हैं।
जुलाई से हो रही राज्यपालों की अदलाबदली
हालांकि मुख्यमंत्री लाल थनहवला ऐसी किसी भी धारणा से इनकार करते हैं। उन्होंने कहा कि नए राज्यपाल दूसरे राज्यपालों से ज्यादा दिनों तक यहां रुकेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, इसलिए वह इस्तीफा नहीं देंगे। वह मिजोरम को समय देंगे।
उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने कमान संभालने के बाद से ही यूपीए द्वारा नियुक्त राज्यपालों को हटाना शुरु कर दिया था। केंद्र के दबाव के कारण कई राज्यपालों ने इस्तीफा दे दिया। जिन्होंने इस्तीफा नहीं दिया उनका तबादला कर दिया गया और उन्होंने तबादले का बाद इस्तीफा दे दिया।
मिजोरम में राज्यपालों की अदलाबदली कि प्रक्रिया पिछली जुलाई से शुरु हुई। जुलाई में राज्य के राज्यपाल वीबी पुरुषोत्तम ने नगालैंड तबादला किए जाने के बाद इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि तबादले से पहले उनसे पूछा भी नहीं गया, राज्यपालों के साथ ऐसे व्यवहार नहीं किया जा सकता।
कमला बेनीवाल केवल एक दिन रहीं मिजोरम में
उसके बाद गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल को मिजोरम भेजा गया। हालांकि राष्ट्रपति भवन ने उन्हें महीने भर में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण हटा दिया। उन पर यह भी आरोप लगा कि राज्यपाल रहते हुए वह केवल एक दिन मिजोरम में रहीं।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायणन को उसके बाद मिजोरम भेजा गया। हालांकि उन्होंने तुरंत ही इस्तीफा दे दिया। शंकर के इस्तीफे के बाद मणिपुर के तत्कालीन राज्यपाल वीके दुग्गल को मिजोरम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। हालांकि उन्होंने भी सितंबर महीने में इस्तीफा दे दिया।
उसके बाद मेघालय के राज्यपाल केके पॉल को मिजोरम और मणिपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। 30 दिसंबर को पॉल को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया।
राज्यपालों की तेजी से अदलाबदली से राज्य में एक नए विवाद ने तूल पकड़ लिया। मिजोरम के राजनीतिक दलों और सिविल सोसयटी का आरोप है कि केंद्र सरकार राज्य का इस्तेमाल डंपिंग ग्राऊंड के रूप में कर रही है।