खबर यूं तो बेहद चौंका देने वाली है, हैरान कर देने वाली है और परेशान कर देने वाली भी। एक अभिनेत्री को वेश्यावृति के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस खबर के सामने आने से सामने आ गई है सुनहरे पर्दे के पीछे की काली हकीकत।
2002 में एक फिल्म आई थी, नाम था मकड़ी। इस फिल्म ने काफी तारीफें बटोरी थीं और इसी फिल्म में पहली बार दिखी थी वह लड़की जिसको अब इन गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है।
आपको इस फिल्म की वह बाल कलाकार तो याद ही होगी जो चुड़ैल के जाल में फंस जाती है। उसी श्वेता बासु प्रसाद पर लगे हैं जिस्मफरोशी के आरोप। इससे पहले भी उन पर एक बार ऐसे आरोप लगे थे लेकिन इस बार उनको रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।
देखिए श्वेता बासु प्रसाद का स्टिंग ऑपरेशन
पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि आखिर वह कौन सी परिस्थितियां थीं जिनके कारण यह अभिनेत्री जिस्मफरोशी के जाल में उलझ गई। मात्र 23 साल की इस अभिनेत्री को हैदराबाद के बंजारा हिल्स इलाके के मशहूर होटल से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है और साथ ही इस रैकेट के तारों को भी खंगाल रही है। तेलुगू टीवी चैनल टीवी6 ने भी श्वेता का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस स्टिंग पर काफी विवाद भी हुआ था लेकिन इस बार तो उनको रंगेहाथ पकड़ा गया।
इस पर उन्होंने एक बयान भी दिया। उन्होंने कहा कि वे अकेली ऐसी अभिनेत्री नहीं हैं जो इस धंधे में आ गईं। उन्होंने कहा कि,"मेरे ऊपर जिम्मेदारियां थीं, और ऐसा करने वाली मैं अकेली नहीं हूं।"
पढ़िए श्वेता बासु प्रसाद की पूरी कहानी
श्वेता बासु प्रसाद का जन्म 11 जनवरी 1991 को जमशेदपुर (झारखंड) में हुआ था। बिहारी पिता और बंगाली मां की संतान श्वेता की पढ़ाई मुंबई के आरएन पोद्दार स्कूल में हुई थी।
11 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। 'मकड़ी' में उन्होंने चुन्नी और मुन्नी नाम की जुड़वां बहनों का किरदार निभाया था। इस फिल्म को विशाल भारद्वाज ने निर्देशित किया था।
इस फिल्म में शबाना आजमी, विजय राज और मकरंद देशपांडे जैसे सितारे थे लेकिन फिर भी श्वेता ने अपनी मासूम एक्टिंग से सबका ध्यान खींचा। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए उन्हें बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का नेश्नल अवार्ड भी मिला था।
श्वेता बासु प्रसाद: ऐसे खत्म हुई चमक
2005 में आई 'इकबाल' में भी उनके काम की बहुत तारीफ हुई। उन्हें बेस्ट स्पोर्टिंग एक्ट्रेस के फिल्मफेयर के लिए भी नॉमिनेटिड किया गया। इसके बाद वह 'वाह, लाइफ हो तो ऐसी' और 2006 में आई 'डरना जरूरी है' में भी दिखाई दीं।
उन्होंने छोटे पर्दे के लिए भी काम किया था। वह 'कहानी घर घर की' और 'करिश्मा का करिश्मा' में भी नज़र आई थीं। इसके बाद वह तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री की ओर चली गईं। उनकी पहली ही फिल्म वहां बड़ी हिट साबित हुई।
उन्होंने बंगाली सिनेमा के लिए भी काम किया। 2008 में आई इस फिल्म में मिथुन भी थे। इसके बाद उनकी फिल्में आती रही और औसत कामयाबी भी हासिल करती रही लेकिन उन्हें कोई करिश्माई सफलता नहीं मिली। 2011 में उन्होंने एक तमिल फिल्म में भी काम किया।