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शरद पवार के इरादे पर उद्धव ने फेर दिया पानी

Wed, 19 Nov 2014 04:53 PM IST
एजेंसी, ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
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महाराष्ट्र में भाजपा सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। मराठा छत्रप शरद पवार जहां अचानक पैतरा बदलते हुए मध्यावधि चुनाव की बात करने लगे हैं तो वहीं शिवसेना ने एनसीपी के इरादों पर पानी फेरते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी हालत में महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव नहीं होने देगी। शिवसेना के इस रुख से जहां दोनों भगवा दलों के साथ आने की संभावना को बल मिला है, वहीं फडणवीस सरकार पर मंडरा रहे संकट के बादल भी छंटते नजर आ रहे हैं।
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मंगलवार से रायगढ़ जिले के अलीबाग में एनसीपी की दो दिवसीय चिंतक बैठक शुरू हुई। इसमें पवार ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जनता ने किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है, इसलिए सरकार पांच साल तक चलनी मुश्किल है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। एनसीपी प्रमुख के इस बयान पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा कि पवार जो बोलते हैं वह कभी नहीं करते। राज्य की राजनीतिक स्थिति इस मोड़ पर पहुंच गई है कि कौन किसके साथ है, यह भी पता नहीं चल रहा है। विपक्ष में बैठकर महाराष्ट्र की जनता के लिए जो कुछ भी बन पड़ेगा, वह करेंगे।

बीजेपी सरकार को समर्थन के मुद्दे पर उद्धव ने संयमित भाषा का इस्तेमाल किया जबकि शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने जोर देकर कहा कि शिवसेना मध्यावधि चुनाव नहीं होने देगी। राउत ने कहा कि राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना है, इसलिए सत्ता की चाबी शिवसेना के पास है। राउत के इस बयान को राजनीतिक नजरिए से देखे तो महाराष्ट्र की सरकार में एक तरह से भाजपा-शिवसेना का सुर मिलता दिखाई दे रहा है।
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शिवसेना के लिए बंद नहीं हैं दरवाजे-फडणवीस
राज्य में मध्यावधि चुनाव की आशंका और शिवसेना से जारी तनातनी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर दोहराया कि शिवसेना के लिए बातचीत के दरवाजे बंद नहीं थे। विश्वास है कि बातचीत होगी और सकारात्मक फैसला होगा। सरकार स्थिर है और सारे निर्णय लेने का हमें कानूनी अधिकार है। किसी भी पार्टी या विधायक को मध्यावधि चुनाव नहीं चाहिए। जनता ने पांच साल के लिए हमें चुना है, हम पूरे कार्यकाल तक काम करेंगे।

बीजेपी को समर्थन की घोषणा के बाद पवार का यू टर्न

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मध्यावधि चुनाव के लिए तैयार रहने के लिए कहकर महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पवार ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग में पार्टी की दो दिवसीय बैठक में कार्यकर्ताओं से कहा कि वह हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद पैदा हुए राजनीतिक हालात के मद्देनजर कभी भी होने वाले चुनाव के लिए तैयार रहें।

भाजपा सरकार को बिना शर्त समर्थन की घोषणा करने वाले पवार ने यू टर्न लेते हुए कहा कि राज्य में स्थिर सरकार बनाए रखने की जिम्मेदारी एनसीपी की नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मौजूदा हालात लंबे समय तक के लिए राजनीतिक स्थिरता की तरफ इशारा नहीं कर रहे हैं। और अगर राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी रहता है तो अगले चार से छह महीनों में चुनाव हो सकते हैं जो महाराष्ट्र के हित में नहीं होगा।

पवार के यू टर्न पर भाजपा की राज्य इकाई के प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा कि जो महाराष्ट्र में पवार की राजनीति को करीब से जानते हैं उन्हें इस बयान से कोई ताज्जुब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने एनसीपी से न तो समर्थन मांगा था न ही मदद की गुहार लगाई थी बल्कि पवार ने खुद बिना शर्त समर्थन की घोषणा की थी और एक महीने के अंदर ही वह अपनी ही बात से पलट गए। वहीं शिवसेना के सांसद और प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव नहीं होंगे और सरकार की स्थिरता और अस्थिरता की कुंजी शिवसेना के हाथों में है।
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अब आएंगे अच्छे दिन: सामना

दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की दूसरी पुण्यतिथि पर ठाकरे बंधुओं के मिलाप के बाद दोनों के एक साथ आने की अटकलें शुरू हो गई हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना में उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की मुलाकात की तारीफ करते हुए कहा गया है, ‘अब आएंगे अच्छे दिन।’ शिवसेना से अलग होने के लंबे अर्से बाद मुखपत्र में पहली बार उद्धव और राज के मिलन को लेकर अच्छे दिन की कामना की गई है।

बाल ठाकरे के निधन के समय उद्धव और राज ठाकरे के बीच मतभेद चरम पर था। राज ठाकरे उनकी अंतिम यात्रा बीच में ही छोड़कर चले गए थे और बाद में शिवाजी पार्क पहुंचकर अंतिम क्रिया में शामिल हुए थे। दोनों भाइयों के बीच मतभेद इतना गहरा था कि राज ठाकरे अपने चाचा बाल ठाकरे की पहली पुण्यतिथि में भी नहीं गए। राज ठाकरे ने यह कहते हुए शिवाजी पार्क जाने से मना कर दिया था कि वे उनके स्मृति स्थल को राजनीति का मंच नहीं बनाना चाहते।

मगर, विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थिति बदली तो दोनों भाई एक दूसरे के करीब आने लगे हैं। सोमवार को शिवाजी पार्क पहुंचने पर शिवसैनिकों ने राज ठाकरे का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान जब उद्धव और राज एक दूसरे से मिल रहे थे तब शिवसेना और मनसे कार्यकर्ताओं ने भी एकता का स्वर बुलंद किया था। हालांकि शिवसेना के मुखपत्र में अच्छे दिन पर भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है लेकिन समझा जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे के बीच सुलह की कोशिशें तेज हो गई हैं।
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