संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस ने अपने कड़े तेवर कर लिए हैं। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व संकेत दे रहा है कि भले संसद का सत्र हंगामे में धुल जाए, लेकिन पार्टी इस बार मोदी सरकार को राहत लेने नहीं देगी। पिछले 15 दिनों में कांग्रेस अचानक टकराव की राजनीति की ओर बढ़ चली है।
मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के तहत मंत्रियों के शपथ समारोह का बहिष्कार करने के बाद कांग्रेस अब संसद के शीत सत्र में देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने, दागी मंत्रियों, काले धन, गंगा सफाई, खाद्य सुरक्षा और मनरेगा कानून समेत तमाम मुद्दों के साथ महंगाई को भी बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
इन सभी मुद्दों को लेकर पार्टी सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगने की जिद करेगी। यही नहीं जयंती समारोह में मोदी विरोधी राजनीतिक दलों को बुलाकर कांग्रेस ने सरकार को ट्रेलर दिखा दिया है कि वे ही नहीं बल्कि दूसरे दलों को धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर एकजुट रखकर सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह घेरा जाएगा।