जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे तीन दिन की यात्रा पर शुक्रवार को भारत आ रहे हैं। वह यहां भारत-जापान सम्मेलन में शामिल होने के साथ ही वाराणसी भी जाएंगे। इस दौरान दोनों देश कई अहम समझौते पर दस्तखत भी करेंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल जापान गए थे।
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ईस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर श्रीकांत कोंडपल्ली ने दोनों देशों की करीबी के बारे में बताया, "जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे जब 2007 में भारत आए थे तब उन्होंने संसद में अपने भाषण में आर्क ऑफ फ्रीडम एंड प्रॉस्पेरिटी (स्वतंत्रता और समृद्दि के वृत्त) का जिक्र किया था। लगता है कि आज दोनों देश इस बारे में एकमत हैं।"
प्रधानमंत्री मोदी ने जापान यात्रा पर लोकतंत्र के बारे में बात की थी। जापान दक्षिण एशिया का पहला देश था जहां मोदी ने लोकतंत्र के बारे में बात की थी। वे कहते हैं, "लगता है कि इससे अबे और मोदी के बीच एक सहमति बनी जो बहुत महत्वपूर्ण है। जापान ने अगले पांच साल में भारत में 33 अरब डॉलर का निवेश करने की बात भी कही थी।" कोंडपल्ली के मुताबिक अब लगने लगा है कि दोनों देशों को आर्क ऑफ फ्रीडम एंड प्रॉस्पेरिटी लागू करने की स्थिति आ गई है। दोनों देशों में कैसे समझौते हो सकते हैं?