मुसलमानों को सांप्रदायिकता के आधार पर वोट देने की कथित अपील को लेकर विवाद में आई ‘आप’ नेता शाजिया इल्मी ने सफाई देते हुए कहा कि उनके कथन का मकसद कटाक्ष करना था।
बुधवार को एक बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस बात से हतप्रभ हैं कि बात का बतंगड़ कैसे बना दिया गया। दरअसल उन्होंने कटाक्ष के तौर पर सांप्रदायिक शब्द का इस्तेमाल किया था।
शाजिया के वीडियो टेप पर मचा था बवाल
उन्होंने कहा, ‘मैं तो मुसलमानों के लिए एक बात कह रही थी, जिनका धर्मनिरपेक्षता के नाम पर लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। बेहतर होगा कि वे शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान दें।
शाजिया ने कहा कि उन्हें दुख है कि उनकी बात को गलत ढंग से लिया गया। मैं और मेरी पार्टी सांप्रदायिकता में विश्वास नही करती है और न ही कभी करेगी। मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया और उसका गलत अर्थ निकाला गया।’
मुसलमानों से बात करते हुए शाजिया इल्मी का एक वीडियो टेप सार्वजनिक हुआ था, जिसमें उन्हें यह बोलते हुए पाया गया कि मुसलमानों को अपनी भलाई की खातिर थोड़ा कम धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और थोड़ा सा सांप्रदायिक भी हो जाना चाहिए।
'शाजिया के खिलाफ चुनाव आयोग करे कार्रवाई'
भाजपा ने आम आदमी पार्टी की नेता शाजिया इल्मी की मुसलमानों को सांप्रदायिकता के आधार पर वोट देने की कथित अपील की निंदा करते हुए चुनाव आयोग से उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘यह बयान निंदनीय है। जनता में सांप्रदायिकता का जहर घोलने की साजिश रची जा रही है। हम इसकी निंदा करते हैं।’
उन्होंने कहा कि शाजिया इल्मी को तुरंत माफी मांगनी चाहिए, नहीं तो चुनाव आयोग को उचित कार्रवाई करनी चाहिए।