आगरा धर्म परिवर्तन का विवाद लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक सियासी घमासान मचा हुआ है।
इस बीच धर्म परिवर्तन को लेकर द्वारिका एवं ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने और सत्ता या सरकार से लाभ लेने के लिए किए जाने वाला धर्मान्तरण गलत है।
शंकराचार्य का कहना है कि जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाना अनुचित है। महात्मा गांधी ने भी इसका विरोध किया था। लेकिन यदि कोई स्वेच्छा से अपनी धार्मिक आस्था बदलना चाहता है और सनातन धर्म को अपनाता है तो उसका स्वागत है।
अमर उजाला से फोन पर विशेष बातचीत में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण को राजनीतिक मुद्दा बनाकर वोट बटोरने की कोशिश गलत है।
यह पूछने पर कि चातुर्वर्ण व्यवस्था वाले हिंदू समाज में अन्य धर्मों से आने वालों का वर्ण क्या होगा? शंकराचार्य ने कहा, "उनके पूर्वज जिस वर्ण में थे उसी वर्ण में उन्हें स्थान मिलना चाहिए। इसके अलावा भगवत वर्ण के नाम से एक नया वर्ण भी बनाया जा सकता है।"
लेकिन शंकराचार्य ने साफ कहा कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए भीड़ जमा कर धर्मांतरण का ढोल पीटना ठीक नहीं है। इससे सनातन धर्म का लाभ नहीं हानि ही होगी।