फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'इंटरनेट सेवा बंद करना नाजायज नहीं'

विज्ञापन
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कहीं धारा-144 (निषेधाज्ञा) लगी हो तो वहां मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार केद्वारा ऐसा किया जा सकता है।
विज्ञापन


चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुजरात सरकार द्वारा पाटीदार आंदोलन के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवा पर लगाए गए प्रतिबंध को जायज करार दिया है। पीठ ने कहा कि जब धारा-144 लगा हुआ हो तो कानन-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए गए इस तरह केनिर्णय को गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता।
 
गत 15 सिंतबर को गुजरात हाईकोर्ट ने विधि छात्र गौरव व्यास की उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें पाटीदार आंदोलन केदौरान मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगाने केसरकार केनिर्णय को गलत ठहराने की गुहार की गई थी। याचिकाकर्ता ने सरकार केइस निर्णय को मूल अधिकारों का हनन बताया था।
विज्ञापन

विज्ञापन

'धारा-144 के तहत इस पर प्रतिबंध लगाना अधिरोहण'

गुजरात हाईकोर्ट केइस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ केसमक्ष कहा कि धारा-144 के तहत मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता क्योंकि इस स्थिति से निपटने का विशेष अधिनियम (टेलिग्राफ एक्ट) में अलग से प्रावधान है।

अगर विशेष कानून प्रभावी है तो ऐसे में धारा-144 के तहत इस पर प्रतिबंध लगाना अधिरोहण है। उन्होंने कहा कि धारा-144 के तहत मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। लेकिन पीठ ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए कहा कि दोनों अधिकारों का उपयोग एक साथ किया जा सकता है।

पीठ ने कहा कि कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जाती है जब कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी हो जाता है। गत वर्ष पाटीदार आंदोलन के दौरान राज्य सरकार ने 10 दिनों तक मोबाइल इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लगा दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें