सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में राज्यपाल कमला बेनीवाल द्वारा आठ साल से खाली पड़े लोकायुक्त पद पर जस्टिस (सेवानिवृत्त) आरए मेहता की नियुक्ति को जायज ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले को गुजरात में जीत की हैट्रिक का जश्न मना रही नरेंद्र मोदी सरकार के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है।
कोर्ट ने बुधवार को अपने फैसले में राज्यपाल को भी नसीहत देते हुए कहा कि उन्होंने राज्य सरकार की सलाह के बगैर लोकायुक्त की नियुक्ति कर ‘अपनी भूमिका को समझने में चूक’ की। वैसे कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल ने गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश की सलाह इस मामले में ली थी, अत: नियुक्ति को गलत नहीं ठहराया जा सकता। सर्वोच्च अदालत ने मोदी सरकार से जल्दी से जल्दी लोकायुक्त का कार्य शुरू करने के लिए संबंधित व्यवस्थाएं करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि बेनीवाल ने मेहता को अगस्त 2011 में गुजरात का लोकायुक्त बनाया था। इस पर राज्य सरकार से उनके गहरे मतभेद खुल कर सामने आ गए थे। राज्य सरकार का तर्क था कि उसकी सलाह के बगैर नियुक्ति गलत है। मोदी सरकार ने तब गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने लोकायुक्त को बरकरार रखा। तब मोदी सरकार 18 जनवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीएस चौहान और न्यायाधीश एफएम इब्राहिम कलीफुल्ला की पीठ ने अपने फैसले में मोदी सरकार द्वारा लंबे समय तक लोकायुक्त का पद खाली रखने के फैसले पर निराशा जताई और राज्य सरकार के इस तर्क से असहमति व्यक्त की कि राज्यपाल को लोकायुक्त पर अनिवार्य रूप से राज्य मंत्रिमंडल की सलाह माननी चाहिए थी। साथ ही कहा कि राज्य सरकार को लोकायुक्त की नियुक्ति की जानकारी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पत्र के माध्यम से राज्य सरकार को सूचित किया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी सरकार की लोकायुक्त की नियुक्ति खारिज करने की मांग को अस्वीकार करते हुए इतना जरूर कहा कि वर्तमान राज्यपाल ने अपनी भूमिका को समझने में गलती की और जिस प्रकार से केवल गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एवं राज्य में विपक्ष के नेता से ही विचार किया, वह संविधान की लोकतांत्रिक संरचना के अनुरूप नहीं है।
मोदी को मिली थोड़ी सी राहत
मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत यह मिली है कि अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट से लोकायुक्त मामले में मोदी सरकार के खिलाफ की गई कड़ी टिप्पणियां हटाने को कहा है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार द्वारा लोकायुक्त नियुक्ति के विरुद्ध याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि विरोध का यह कृत्य द्वेषपूर्ण है और मुख्यमंत्री (नरेंद्र मोदी) को अपराजेय होने की गलतफहमी हो गई है।
फैसले को जल्दी लागू करेंगे: गुजरात सरकार
गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल द्वारा राज्य लोकायुक्त पद पर न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) आरए मेहता की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रखे जाने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को जल्द लागू करेगी।
राज्य के कानून मंत्री भूपिंदर सिंह चूडास्मा ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा, ‘हम जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के इस दावे को स्वीकार किया है कि राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की राय से काम करना चाहिए।’ चूडास्मा ने कहा कि फैसला पढ़ने के बाद वह मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे।
गुजरात के सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च अदालत के फैसले का स्वागत किया है। राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अदालत में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता मुकुल सिन्हा ने कहा, ‘सर्वोच्च अदालत का यह फैसला न केवल गुजरात के लिए बल्कि देश के सभी राज्यों के नजरिये से महत्वपूर्ण है। अदालत के फैसले के बाद गुजरात को निष्पक्ष लोकायुक्त मिल सकेंगे।’ सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सितलवाड ने कोर्ट के फैसले को संवैधानिक व्यवस्था की जीत बताया। उन्होंने कहा, ‘कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।’
केंद्र कर सकता है मोदी को परेशान
गुजरात के लोकायुक्त मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भाजपा को आशंका है कि कांग्रेस और यूपीए सरकार लोकायुक्त के बहाने सत्ता की हैट्रिक लगाने वाले मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को परेशान कर सकते हैं। हालांकि भाजपा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कैबिनेट की सर्वोच्चता को स्वीकार किया है, जो पार्टी के रुख की जीत है।
भाजपा ने कहा कि वह इस फैसले का पूरा अध्ययन करने के बाद ही टिप्पणी करेगी। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि लोकायुक्त की नियुक्ति में कैबिनेट की राय मानने संबंधी प्रदेश सरकार की मांग सही थी। कैबिनेट की राय को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि दिल्ली में उसने लोकायुक्त की राय को नहीं माना और प्रदेश के मंत्री राजकुमार चौहान आज भी जमे हैं।
राज्यपाल को मंत्रिमंडल की सलाह से काम करना चाहिए था लेकिन जस्टिस मेहता की नियुक्ति सही थी क्योंकि यह गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा सलाह मशविरे से हुई थी।- सुप्रीम कोर्ट
- मुझे नहीं लगता कि लोकायुक्त पद पर काम करते हुए मोदी सरकार का रवैया किसी तरह की चुनौती पेश करेगा। राज्य सरकार भी मान चुकी है कि गुजरात में लोकायुक्त की जरूरत है।- जस्टिस (रिटायर्ड) आरए मेहता, लोकायुक्त गुजरात