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इशरत मामले में सुनवाई के लिए तैयार हुई सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है जिसमें इशरत जहां एनकाउंटर मामले में पुलिस अधिकारियों पर चल रहे आपराधिक मुकदमों को बंद करने की गुहार की गई है।
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वास्तव में याचिका में मुंबई हमले के दोषी डेविड हेडली के उस बयान का हवाला दिया गया है जिसमें उसने कहा था कि इशरत और उसके तीन सहयोगी लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े हुए थे और वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की फिराक में थे। याचिका एडवोकेट एमएल शर्मा द्वारा दाखिल की गई है।

शर्मा ने मंगलवार को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उल्लेख करते हुए इस याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। जिस पर पीठ ने कहा कि तय नियम के तहत इस याचिका पर सुनवाई होगी। शर्मा ने अपनी याचिका में गुहार की है कि सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेते हुए तत्कालीन गृह मंत्री और सीबीआई निदेशक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही या अदालत के समक्ष झूठ बोलने की कार्रवाई करनी चाहिए।
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याचिका में कहा गया है कि इन लोगों ने इशरत जहां मामले में सुप्रीम कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की और गलत तथ्य पेश किए।

आतंकियों को मारना अपराध नहीं: याची

मालूम हो कि पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने हाल ही में यह दावा किया है कि वर्ष 2009 में राजनीतिक दबाव पर गुजरात हाईकोर्ट में दिए हलफनामे में इशरत और उसके सहयोगियों के लश्कर-ए-ताइबा से लिंक को बदल दिया गया था।

इस मामले में तत्कालीन यूपीए सरकार ने दो हलफनामा दाखिल किया था। पहले हलफनामे में कहा गया था कि कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने वाली इशरत और उसके तीन सहयोगी आतंकी थे। वहीं दो महीने बाद वर्ष 2009 में दाखिल दूसरे हलफनामे में कहा गया था कि उनके आतंकी होने के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं।

मालूम हो कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में तत्कालीन डीआईजी डीजी बंजारा सहित कई पुलिस अधिकारी मुकदमा झेल रहे हैं। साथ ही याचिका में गुहार लगाई गई है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि आतंकियाें को मारना भारतीय कानून के तहत अपराध नहीं है। साथ ही याचिका में इन पुलिस अधिकारियों को मुआवजा देने की गुहार की गई है।
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राजनीतिक कारणों से बदला गया शपथपत्र: आरके सिंह

इशरत जहां एनकाउंटर मामले में जारी विवाद और पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई के ताजा आरोप के बीच पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने दावा किया कि मामले में राजनीतिक कारणों से शपथपत्र बदला गया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्य प्रश्न यह है कि इसे किसके इशारे पर बदला गया और क्यों। वर्तमान में बिहार से भाजपा से सांसद पूर्व गृह सचिव ने सवाल उठाया कि जब आईबी ने कहा था कि इशरत जहां का संबंध लश्कर से था तो फिर शपथपत्र क्यों बदला गया।

इशरत अपने साथी जावेद शेख के आतंकी संबंध के बारे में जानती थी, वह उसके साथ दो जगह गई भी थी। सिंह ने कहा कि इशरत इस बात से पूरी तरह वाकिफ थी कि वह क्या कर रही है।
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