दलित चिंतक व लेखक कंवल भारती के फेसबुक कमेंट पर उनकी गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
न्यायाधीश एच एल गोखले की बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि क्यों कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए कंवल भारती को गिरफ्तार किया गया।
कंवल भारती ने आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन मामले में उनके समर्थन में फेसबुक पर टिपण्णी की था। इसके बाद उन्हें यूपी सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया।
भारती के खिलाफ एक व्यक्ति ने कोतवाली में फेसबुक पर की गई टिप्पणी में धार्मिक उन्माद और वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के सोशल नेटवर्किंग साइट पर कथित आपत्तिजनक टिपण्णी करने पर उसे वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के बिना पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकती।
कोर्ट ने राज्य सरकार को केंद्र के उस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया जिसमें कहा गया है कि आपत्तिजनक टिपण्णी करने के मामलों में आईजी, डीजीपी या एसपी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अनुमति आवश्यक है।