देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी को ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने के केंद्र सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।
सर्वोच्च अदालत ने बुधवार को कहा कि आखिर क्यों कुछ लोगों को सरकार की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है जबकि वह प्राइवेट सुरक्षा गार्डों से संरक्षण ले सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि अगर राजधानी में समुचित सुरक्षा व्यवस्था होती, तो पांच साल की बच्ची से बलात्कार नहीं होता।
सिर्फ कुछ लोगों को ही सुरक्षा मुहैया कराई जाती है जबकि देश में आम आदमी सुरक्षा की कमी के चलते असुरक्षित है।
जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमने अखबार में पढ़ा है कि गृह मंत्रालय ने एक बिजनेसमैन को सीआईएसएफ की सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आखिर क्यों सरकार इस व्यक्ति को सुरक्षा उपलब्ध करा रही है।
पीठ ने कहा कि यदि किसी को खतरा है तो उसे निजी सुरक्षा गार्डों से सुरक्षा लेनी चाहिए। प्राइवेट बिजनेसमैन को पहले पंजाब में सुरक्षा मुहैया करायी जाती थी, लेकिन अब यह संस्कृति मुंबई भी पहुंच गई।
हालांकि पीठ ने कहा कि हमें इससे कोई लेना-देना नहीं कि एक्स, वाई, जेड व्यक्ति को सुरक्षा मुहैया करायी गई है। मगर हमें आम आदमी की सुरक्षा की फिक्र है।
सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश निवासी की ओर से लालबत्ती और सुरक्षा के दुरुपयोग के खिलाफ दायर याचिका पर की।
पीठ ने पंजाब और हरियाणा के गृह सचिव को भी इस मसले पर अगली सुनवाई में पेश होने का आदेश जारी किया। साथ ही केंद्र से पूछा कि कितने दागी, अपराधी और निजी लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई गई है।
गौरतलब है कि हाल ही में अंबानी को जेड क्लास की सुरक्षा मुहैया कराए जाने के फैसले पर वामपंथी दलों ने कड़ा विरोध किया था।
मगर सरकार ने साफ किया था कि बिजनेसमैन को उनके खर्च पर सुरक्षा मुहैया करायी गई है। आंकड़ों के मुताबिक इस सुरक्षा का खर्च हर माह करीब 15-16 लाख रुपये है, जो सुरक्षाकर्मियों के वेतन के आधार पर जोड़ा गया है।