सुप्रीम कोर्ट ने जाट आरक्षण संबंधी अपने फैसले में किसी प्रकार के फेरबदल से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि जाट आरक्षण को निरस्त करने का फैसला इस सत्र के लिए चल रही दाखिले की प्रक्रिया पर भी लागू होगा। हालांकि अदालत ने कहा कि जिनका दाखिला हो चुका है, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
शीर्ष अदालत ने जाट छात्रों के समूह द्वारा दाखिल उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इस वर्ष पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के दाखिले में उन्हें ओबीसी श्रेणी में रहने दिया जाए। छात्रों का कहना था कि 17 मार्च के आदेश के बाद मेरिट लिस्ट में बदलाव हो गया है ओर उन्हें अब सामान्य वर्ग में डाल दिया गया है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगई और न्यायमूर्ति रोहिंगटन नरीमन की पीठ ने कहा है कि शीर्ष अदालत के आदेश से साफ है कि इस सत्र के लिए चल रही दाखिले की प्रक्रिया में भी जाट छात्र ओबीसी के तहत दाखिले के हकदार नहीं हैं।
पीठ ने कहा कि 9 अप्रैल 2014 के अंतरिम आदेश में ही साफ कर दिया था कि ओबीसी कोटे केतहत जाट छात्रों का दाखिला इस लंबित जनहित याचिका के अंतिम निर्णय पर निर्भर है। हालांकि अदालत ने कहा है जिन छात्रों को दाखिल मिल चुका है, उन पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।