अयोध्या के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भारतीय जनता पार्टी और वीएचपी से जुड़े कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत करीब 20 और लोगों को आपराधिक साजिश रचने के आरोप में नोटिस जारी किया है।
सर्वोच्च अदालत ने इन नेताओं के खिलाफ ये नोटिस अयोध्या केस में बरी किए जाने को लेकर जारी किया है। बता दें कि साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।
इस फैसले के करीब एक साल बाद सीबीआई की ओर से मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया। हालांकि इस कार्रवाई में सीबीआई को करीब एक साल का वक्त लग गया।
करीब एक साल बाद सीबीआई ओर से दायर की गई याचिका में उनकी ओर से अपील की गई कि इस मामले पर सुनवाई एक साल के बाद हो।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
इसी मुद्दे पर 77 वर्षीय हाजी महबूब की ओर से एक स्पेशल लीव पेटिशन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई। जिसमें कोर्ट ने आडवाणी समेत सभी 20 लोगों और सीबीआई को नोटिस जारी किया।
कोर्ट की ओर से जारी इस नोटिस पर उन्हें तीन हफ्ते में जवाब देना है। बता दें कि ये पूरा मामला 6 दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस मामले से जुड़ा हुआ है। जिसमें कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई की ट्रायल कोर्ट में साल 2001 में इस केस को ड्रॉप कर दिया।
जिसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। जहां हाईकोर्ट ने भी 2010 में इन सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के एक साल बाद सीबीआई मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर गई। उस समय केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी।
तीन हफ्ते में देना है जवाब
हाजी महबूब की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत बड़े नेताओं पर षडयंत्र का आरोप फिर से बहाल करने का प्रभावी तरीके से प्रयास नहीं करेगी।
इस याचिका में उन्होंने अंदेशा जताया कि इस मामले के एक अन्य आरोपी राजनाथ सिंह फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्री हैं। उनके मंत्रालय का सीबीआई पर प्रशासनिक नियंत्रण है। महबूब ने आशंका जताई है कि ऐसे में सीबीआई प्रभावी तरीके से अपने पक्ष को नहीं रखेगी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि एक अन्य आरोपी कल्याण सिंह फिलहाल राजस्थान के राज्यपाल हैं।
याचिकाकर्ता महबूब का कहना है कि बाबरी विध्वंस के बाद उनके घर को जला दिया गया। उन्होंने अदालत से गुहार की है कि उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाए।
फिलहाल पूरे मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है। अब इस पर करीब एक महीने के बाद फिर से सुनवाई होगी। वहीं जिन्हें नोटिस जारी किया गया उन्हें 3 हफ्ते में अपना जवाब देना होगा।