भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की गंभीर सेहत पर पाकिस्तान ने चुप्पी साध ली है।
उसने रविवार को भारतीय दूतावास के अधिकारियों को सरबजीत से दूर रखा। यही नहीं, पाकिस्तान पहुंचे सरबजीत के परिवार को भी आईसीयू के बाहर से ही खिड़की से उसे देखने दिया गया।
पाकिस्तान ने सरबजीत की सेहत को लेकर कोई मेडिकल बुलेटिन भी नहीं जारी किया है। वहीं करीब 48 घंटों से सरबजीत की हालत पर नजर रखे डॉक्टरों ने कहा है कि उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं है।
सरकारी डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने रविवार को भी सरबजीत की सेहत का जायजा लिया और कहा कि उसकी सर्जरी नहीं की जा सकती। वह ‘डीप कोमा’ में है और सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों के मुताबिक उसके बचने के मौके ‘बेहद कम’ हैं।
सरबजीत पर शुक्रवार को लाहौर की कोट लखपत जेल में करीब छह कैदियों ने जानलेवा हमला किया था। उसके सिर, चेहरे, गर्दन और पेट पर गंभीर चोटें आई हैं। उसके सिर में फ्रेक्चर हो गया है।
उसे सरकारी जिन्ना अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार तक सरबजीत की सेहत को लेकर चिंता जताते हुए भारत से सहयोग कर रहे पाकिस्तान ने रविवार सुबह भारतीय अधिकारियों को उस पर नजर तक नहीं डालने दी।
इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से इस पर विरोध जताया। भारत ने कहा कि अधिकारियों को सरबजीत की सेहत के बारे में जानने दिया जाना चाहिए। लेकिन पाकिस्तान का कोई जवाब नहीं आया।
इतना ही नहीं, रविवार को जब सरबजीत का परिवार (पत्नी, बहन और दो बेटियां) वाघा बॉर्डर पार कर यहां पहुंचा तो उन्हें केवल आईसीयू की खिड़की से ही उसे देखने दिया गया। उनसे कहा गया, ‘पास जाने से मरीज को खतरा पैदा हो सकता है।’
लेकिन जब कहा गया कि अस्पताल की ड्रेस और मास्क पहन कर वे अंदर जा सकते हैं, तो डॉक्टरों ने कहा, ‘हम मौका नहीं ले सकते। वह वेंटिलेटर पर है और कोई उसके पास नहीं जा सकता।’
सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रशासन को डर था कि यदि परिजनों ने आईसीयू में रोना शुरू कर दिया तो स्थिति बेकाबू हो सकती है और पाकिस्तान सरकार को ज्यादा जटिल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
जबकि पहले पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि सरबजीत के परिवार के एक सदस्य को उसके कमरे में रहने की इजाजत दी जाएगी। सरबजीत के परिजनों को बाद में नजदीक के एक होटल में ले जाया गया।
पाकिस्तान सरकार की खामोशी के इतर डॉक्टरों ने यह कह कर चिंता बढ़ा दी है कि सरबजीत की स्थिति में 48 घंटों में ‘कोई सुधार नहीं’ हुआ है और उसके बचने के मौके ‘बेहद कम’ हैं।
डॉन अखबार के अनुसार, डॉक्टर मान रहे हैं कि उसे सर्जरी की जरूरत है, लेकिन उसकी हालत सर्जरी करने जैसी नहीं है।
इसके अलावा कोमा की गंभीरता को नापने की इकाई ग्लासगो कोमा के 15 तक के स्केल पर पर वह 3 पर है।
जहां से कोमा में गए मरीज का पुन: होश में आना मुश्किल होता है। सरबजीत की यह स्थिति पाकिस्तानी डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।